हज़रत शाह ‘अकबर’ दानापुरी और “हुनर-नामा”

फिरेंगे कैसे दिन हिंदुस्ताँ के

बला के ज़ुल्म हैं इस आसमाँ के

अगर हिंदू-मुसलमाँ मेल कर लें

अभी घर अपने ये दौलत से भर लें

गया इक़्बाल फिर आए हमारा

अभी इदबार गिर जाए हमारा

इलाही एक दिल हो जाएं दोनों

वज़ारत इंडिया की पाएं दोनों

सन्यासी फ़क़ीर आंदोलन – भारत का पहला स्वाधीनता संग्राम

बात उस समय की है जब अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान पर अपना अधिकार जमाने के पश्चात इसे लूटना प्रारंभ कर दिया था । हिन्दुस्तान की जनता उनके तरह तरह के हथकंडों से परेशान हो चुकी थी. । अंग्रेजों ने अपने साथ यहाँ के जमींदारों और साहूकारों को भी मिला  लिया था और इनकी सांठ-गाँठ से देश… continue reading

अल-ग़ज़ाली की ‘कीमिया ए सआदत’ की चौथी क़िस्त

तृतीय उल्लास (माया की पहचान) पहली किरण-संसार का स्वरूप, जीव के कार्य और उसका मुख्य प्रयोजन याद रखो, यह संसार भी धर्ममार्ग का एक पड़ाव ही है। जो जिज्ञासु भगवान् की ओर चलते हैं, उनके लिये यह मार्ग में आया हुआ ऐसा स्थान है, जैसे किसी विशाल वन के किनारे कोई नगर या बाजार हो।… continue reading

शैख़ फ़रीदुद्दीन अत्तार और शैख़ सनआँ की कहानी

शैख़ फ़रीदुद्दीन अ’त्तार ने अपनी सूफ़ियाना शाइरी से फ़ारसी सूफ़ी साहित्य को विश्व भर में स्थापित कर दिया। शैख़ फ़रीदुददीन अ’त्तार के समक्ष मौलाना रूमी अपने आप को तुच्छ समझते थे – हफ़्त शहरे इश्क़ रा अत्तार गश्त मा हनुज़ अन्दर ख़म-ए-यक कूच:ऐम (अर्थात – अ’त्तार ने इश्क़-ए-हक़ीक़ी के सातों शहरों का भ्रमण कर लिया… continue reading

हज़रत औघट शाह वारसी और उनका कलाम

हिन्दुस्तान की सूफ़ी भक्ति परम्परा कई मायनों में इसे ख़ास बनाती है.सूफ़ियों और भक्ति कवियों ने अपने अपने क्षेत्र के प्रचलित प्रतीकों का अपने काव्य में प्रयोग किया और प्रेम और सद्भावना के सन्देश को आ’म किया. यही कारण है कि हिन्दुस्तान में तसव्वुफ़ और भक्ति आन्दोलन के विविध रूप मिल जाते हैं और हर… continue reading

हज़रत बेदम शाह वारसी और उनका कलाम

सूफ़ी संतों के कलाम भाव प्रधान होते हैं इसलिए जीवन पर अपनी गहरी छाप छोड़ जाते हैं. एक दिन दरगाह निज़ामुद्दीन औलिया में बैठा मैं क़व्वाली सुन रहा था. अक्सर देश भर से क़व्वाल हाज़िरी लगाने हज़रत की दरगाह पर आते हैं और कुछ कलाम पढ़ कर, महबूब-ए-इलाही के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं…. continue reading