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सुल्तान सख़ी सरवर लखदाता-मोहम्मदुद्दीन फ़ौक़

आबा-ओ-अज्दाद पौने सात सौ साल का ज़िक्र है कि एक बुज़ुर्ग ज़ैनुल-आ’बिदीन नाम रौज़ा-ए-रसूल-ए-पाक के मुजाविरों में थे।इसी हाल में वहाँ उनको बरसों गुज़र गए।रसूल-ए-करीम की मोहब्बत से सरशार और रौज़ा-ए-अक़्दस की ख़िदमात में मस्त थे कि ख़ुद आँ-हज़रत सलल्ल्लाहु अ’लैहि व-सलल्लम ने एक रात ख़्वाब में फ़रमाया कि उठ और हिन्दुस्तान की सैर कर।आप… continue reading

साहिब-ए-मा’लूमात-ए-मज़हरिया शाह नई’मुल्लाह बहराइची

हज़रत मौलाना शाह नई’मुल्लाह की पैदाइश 1153 हिज्री मुताबिक़1738 में हुई।आपका मक़ाम-ए-पैदाइश मौज़ा’ भदौनी क़स्बा फ़ख़्रपुर ज़िला’ बहराइच है।आपके वालिद का नाम ग़ुलाम क़ुतुबुद्दीन था। (आसार-ए-हज़रत मिर्ज़ा ‘मज़हर’ जान-ए-जानाँ शहीद 2015, सफ़हा 260) शाह नई’मुल्लाह साहिब अ’लवी सय्यिद थे।आपके मुरिस-ए-आ’ला ख़्वाजा इ’माद ख़िलजी हम-राह सय्यिद सालार मसऊ’द ग़ाज़ी के हिंदुस्तान आए थे और बाराबंकी के क़स्बा केंतोर… continue reading

अस्मारुल-असरार-डॉक्टर तनवीर अहमद अ’ल्वी

अस्मारुल-असरार हज़रत ख़्वाजा सदरुद्दीन अबुल- फ़त्ह सय्यिद मोहम्मद हुसैनी गेसू-दराज़ बंदा नवाज़ की तस्नीफ़-ए-मुनीफ़ है और जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है कि हज़रत के रुहानी अफ़्कार और कश्फ़-ए-असरार से है जिसका बयान आपकी ज़बान-ए-सिद्क़ से रिवायात-ओ-हिकायात की सूरत में हुआ है।जिनके साथ कलामुल्लाह की रौशन आयात और अहादीस-ए-रसूल-ए-मक़्बूल से इस्तफ़ाद-ओ-इस्तिनाद किया गया है।असरार-ए-ग़ैब… continue reading

ज़िक्र-ए-ख़ैर हज़रत सय्यद शाह अ’ज़ीज़ुद्दीन हुसैन मुनइ’मी

सूबा-ए-बिहार का दारुस्सुल्तनत अ’ज़ीमाबाद न सिर्फ़ मआ’शी-ओ-सियासी और क़दीमी लिहाज़ से मुम्ताज़ रहा है बल्कि अपने इ’ल्म-ओ-अ’मल, अख़्लाक़-ओ-इख़्लास, अक़्वाल-ओ-अफ़्आ’ल, गुफ़्तार-ओ-बयान और मा’रिफ़त-ओ-हिदायात से कई सदियों को रौशन किया है। यहाँ औलिया-ओ-अस्फ़िया की कसरत है। बंदगान-ए-ख़ुदा की वहदत है। चारों जानिब सूफ़ियों की शोहरत है।वहीं अहल-ए-दुनिया के लिए ये जगह निशान-ए-हिदायत है। चौदहवीं सदी हिज्री में बिहार के मशाइख़ का अ’ज़ीम कारनामा ज़ाहिर… continue reading

ज़िक्र-ए-ख़ैर हज़रत शाह ग़फ़ूरुर्रहमान ‘हम्द’ काकवी

कमालाबाद उ’र्फ़ काको की क़दामत के तो सब क़ाएल हैं।आज से 700 बरस क़ब्ल मुस्लिम आबादी का आग़ाज़ हुआ। इस तरह तवील अ’र्सा में ना जाने कितने मशाएख़ और दानिश-मंद गुज़रे जिनके मज़ारात आज भी काको के मुख़्तलिफ़ मक़ामात पर शिकस्ता-हाल में मौजूद हैं। काको में चंद ऐसे ख़ानदान भी मौजूद हैं जो तक़रीबन 250 बरस से आबाद हैं।उन्हीं… continue reading

ज़िक्र ए खैर हज़रत शाह अय्यूब अब्दाली इस्लामपुरी

बिहार की सर-ज़मीन हमेशा से मर्दुम-ख़ेज़ रही है। न जाने कितने इल्म ओ अदब और फ़क़्र ओ तसव्वुफ़ की शख़्सियत ने जन्म लिया है। उन्हीं में एक नाम हज़रत सय्यद अलीमुद्दीन दानिश-मंद गेसू दराज़ का है । वो  शहर ए नेशापुर (ईरान) से मुंतक़िल हो कर हिन्दुस्तान में बिहार शरीफ़ (नालंदा) में हज़रत मख़दूम ए… continue reading