पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा “सय्यद शाह मोहम्मद यूसुफ़ बल्ख़ी फ़िरदौसी”

बचपन ही से यूसुफ़ बल्ख़ी बहुत होनहार थे ।उनकी बड़ी बेटी क़मरुन्निसा बल्ख़ी फ़िरदौसी अपने वालिद-ए-माजिद का ज़िक्र करते हुए फ़रमाती हैं कि

“मेरे वालिद माजिद रहमतुल्लाहि अ’लैहि दुबले-पुतले और लंबे थे। लिबास में पाजामा-कुर्ता और टोपी पहना करते। मेहमान-नवाज़ी का बड़ा शौक़ था इसलिए अगर कोई दोस्त मज़ाक़ से भी ये कह देता कि भाई यूसुफ़ रहमानिया होटल सब्ज़ी बाग़ गए हुए कई दिन हो गए तो अब्बा जान मोहतरम उसे फौरन कहते जल्दी चलो जल्दी चलो मैं तुम्हें रहमानिया होटल ले जाता हूँ। अंग्रेज़ी और फ़ारसी में काफ़ी महारत हासिल थी। फ़ारसी और अंग्रेज़ी में घंटों बातें किया करते थे जिसमें उनके अंग्रेज़ी दोस्त होते जिनसे वो बिला झिझक अंग्रेज़ी में बातें किया करते थे। शे’र-ओ-शाइ’री से भी काफ़ी शग़्फ़ था।

Qawwalon ke Qisse-12 Farid Ayaz Qawwal ka Qissa

He woke up in a dingy room of a Delhi 6 guest house, he doesn’t keep his door closed. The neighborhood tea-seller’s ten year old son walked in with a newly learnt Bandish in Raaga Desh. He kept the tempo by drumming a rickety, old bedside table. The boy said, ‘my reward?’ after finishing his… continue reading

Qawwalon ke Qisse -11 -Aziz Miyan Qawwal ka Qissa

अज़ीज़ मियां मेरठी इकलौते ऐसे अनोखे क़व्वाल थे जो अपनी क़व्वालियाँ खुद लिखते थे ।साबरी ब्रदर्स और इनमें एक प्रतिद्वंदिता चलती थी।1975 में अज़ीज़ मियां का नया एल्बम ‘मैं शराबी’ आया, उसी साल साबरी ब्रदर्स का भी नया एल्बम ‘भर दो झोली मेरी या मुहम्मद’बाज़ार में आया जिसके गीत पुरनम इलाहाबादी ने लिखे थे ।… continue reading

Qawwalon ke Qisse-10 Sheikh Manjhu Qawwal ka Qissa

शैख़ मंझू जौनपुर में ही पैदा हुए और वहीं उनकी मृत्यु हुई।वह बचपन से ही संगीत के बड़े प्रेमी थे। मख़्दूम शाह अढ़हन के यहाँ मजलिसों में वह रोज़ उपस्थित रहते थे। यहाँ बड़े बड़े क़व्वाल आया करते थे ।मख़्दूम साहब के निर्देशानुसार मंझू ने संगीत की शिक्षा प्राप्त की।कंठ में मानो ईश्वर का का… continue reading

Qawwalon ke Qisse-9 Meraj Ahmad Nizami ka Qissa

हैदराबाद के सूफ़ी शैख़ एवं शाइर अब्दुल क़ादिर सिद्दीक़ी हसरत ने मौसीक़ी को एक विज्ञान की तरह सीखा न कि प्रदर्शन हेतु। अपने आध्यात्मिक मक़ाम कि वजह से वह माहिरीन-ए-फ़न के घरों या कूचा –ओ-बाज़ार के चक्कर नहीं लगा सकते थे इस कारण से उन्होंने संगीत सीखने का आधुनिक तरीक़ा इख़्तियार किया। बाज़ार में उपलब्ध… continue reading

Qawwalon ke Qisse-8 Khairabad ke Qawwalon ka Qissa

मदन ख़ान नामक से शख़्स अमरोहा के पास रहते थे।वह श्याम-वर्ण के थे और उनकी कद काठी भी अजीब थी। ख़ैराबाद आकर वह शैख़ सअदुद्दीन ख़ैराबादी की ख़ानक़ाह में रहने लगे । उनकी आवाज़ बड़ी अच्छी थी और हज़रत अक्सर उनका गाना सुनते थे।उन्ही दिनों क़न्नौज की एक खूबसूरत गायिका ख़ैराबाद आई हुई थी।मदन साहब… continue reading