Articles By Sufinama

Sufism transcends religion, language, nationality and has, over the years, emerged as a unifying force that moves us beyond the physical realm, into a spiritual one. Sufinama is dedicated to the legend of #Sufis and #Saints of Indian Subcontinent and all over the world. #Sufinama. #Sufism

Qawwalon ke Qisse-15 Azeez Naza.n Qawwal ka Qissa

क़व्वाली का सबसे रोचक पक्ष यह है कि हिंदुस्तान में गंगा-जमुनी तहज़ीब की जब नीव डाली जा रही थी, क़व्वाली ने उस काल को भी अपने रस से सींचा है. क़व्वाली ने हिन्दुस्तानी साझी संस्कृति को न सिर्फ़ बनते देखा है बल्कि इस अनोखी संस्कृति के पैराहन में ख़ूबसूरत बेल बूटे भी लगाये हैं और… continue reading

Qawwalon ke Qisse-14 Pathane Khan ka Qissa

संगीतकार अपने पहले और बाद के युगों के बीच एक पुल का कार्य करते हैं . आने वाली पीढ़ी को अज्ञात के ऐसे पक्ष से भी अवगत करवाते हैं जो हमें कभी याद था पर आज हम उसे भूल चुके हैं. क़व्वालों का काम इस मामले में और भी अहम् यूँ हो जाता है क्यूंकि… continue reading

उर्स के दौरान होने वाले तरही मुशायरे की एक झलक

सूफ़ी दरगाहों पर उर्स के दौरान कई रस्में होती हैं जिनका ज़िक्र गाहे-ब-गाहे होता रहता है. उर्स अक्सर दो या तीन दिनों तक मनाया जाता है जिसमें सूफ़ी मुशायरों का आयोजन भी आ’म है . कुछ दरगाहों पर तरही मुशायरों का आयोजन भी किया जाता था जिसमे एक तरही मिसरा शायरों को दिया जाता था… continue reading

Qawwalon ke Qisse -13. Hamid Ali Bela ka Qissa

हज़रत शाह हुसैन (1538 -1599) पंजाब के अलबेले सूफ़ी थे. उनके पिता शेख़ उस्मान ढड्डे जुलाहे का काम करते थे। उन का जन्म लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ और उन्हें पंजाबी काफ़ी का जनक भी कहा जाता है । उन के कलाम लोगों में बहुत ही हरमन प्यारे रहे हैं । उन की दरगाह बाग़बानपुरे में… continue reading

हिन्दुस्तानी क़व्वाली के विभिन्न प्रकार

हिंदुस्तान में क़व्वाली सिर्फ़ संगीत नहीं है। क़व्वाली इंसान के भीतर  एक संकरे मार्ग का निर्माण करती है जिसमे एक तरफ़ खुद को डालने पर दूसरी और ईश्वर मिलता है। क़व्वाली की विविध विधाएं हिंदुस्तान में प्रचलित रही हैं। ये विधाएं क़व्वाली के विभिन्न अंग हैं जो कालान्तर में क्रमित विकास द्वारा स्थापित हुई हैं।… continue reading

Gems of Persian Sufi poetry

फ़ारसी सूफ़ी काव्य का पहला शाइ’र हज़रत अबू सईद अबुल ख़ैर (सन-997-1049 ई.) को माना जाता है। इन्हों ने ही फ़ारसी काव्य में सबसे पहले ईश्वरीय प्रेम की अभिव्यंजना की.इनके विचार बड़े गहन हैं। सांसारिक वस्तुओं में उन्हें हक़ीक़ी महबूब के रूप की छटा दृष्टिगोचर होती है। ईश्वर से लौ लग जाने के पश्चात लौकिक… continue reading

Qawwalon ke Qisse -11 -Aziz Miyan Qawwal ka Qissa

अज़ीज़ मियां मेरठी इकलौते ऐसे अनोखे क़व्वाल थे जो अपनी क़व्वालियाँ खुद लिखते थे ।साबरी ब्रदर्स और इनमें एक प्रतिद्वंदिता चलती थी।1975 में अज़ीज़ मियां का नया एल्बम ‘मैं शराबी’ आया, उसी साल साबरी ब्रदर्स का भी नया एल्बम ‘भर दो झोली मेरी या मुहम्मद’बाज़ार में आया जिसके गीत पुरनम इलाहाबादी ने लिखे थे ।… continue reading

Qawwalon ke Qisse-10 Sheikh Manjhu Qawwal ka Qissa

शैख़ मंझू जौनपुर में ही पैदा हुए और वहीं उनकी मृत्यु हुई।वह बचपन से ही संगीत के बड़े प्रेमी थे। मख़्दूम शाह अढ़हन के यहाँ मजलिसों में वह रोज़ उपस्थित रहते थे। यहाँ बड़े बड़े क़व्वाल आया करते थे ।मख़्दूम साहब के निर्देशानुसार मंझू ने संगीत की शिक्षा प्राप्त की।कंठ में मानो ईश्वर का का… continue reading

Qawwalon ke Qisse-9 Meraj Ahmad Nizami ka Qissa

हैदराबाद के सूफ़ी शैख़ एवं शाइर अब्दुल क़ादिर सिद्दीक़ी हसरत ने मौसीक़ी को एक विज्ञान की तरह सीखा न कि प्रदर्शन हेतु। अपने आध्यात्मिक मक़ाम कि वजह से वह माहिरीन-ए-फ़न के घरों या कूचा –ओ-बाज़ार के चक्कर नहीं लगा सकते थे इस कारण से उन्होंने संगीत सीखने का आधुनिक तरीक़ा इख़्तियार किया। बाज़ार में उपलब्ध… continue reading

Qawwalon ke Qisse-8 Khairabad ke Qawwalon ka Qissa

मदन ख़ान नामक से शख़्स अमरोहा के पास रहते थे।वह श्याम-वर्ण के थे और उनकी कद काठी भी अजीब थी। ख़ैराबाद आकर वह शैख़ सअदुद्दीन ख़ैराबादी की ख़ानक़ाह में रहने लगे । उनकी आवाज़ बड़ी अच्छी थी और हज़रत अक्सर उनका गाना सुनते थे।उन्ही दिनों क़न्नौज की एक खूबसूरत गायिका ख़ैराबाद आई हुई थी।मदन साहब… continue reading