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हज़रत मुन्इ’म-ए-पाक अबुल-उ’लाई-शाह हुसैन अब्दाली इस्लामपुरी

आपने अपनी सारी ज़िंदगी फ़क़्र-ओ-फ़ाक़ा में बसर की।और रहने के लिए मकान नहीं बनाया और न मुतअह्हिल हुए। आप उमरा से मिलते थे और न नज़्र क़ुबूल करते थे और न अपने पास रुपया पैसा ही रखते थे।

Mystics of the sayyid Lodi period (1414 AD. To 1526 AD. )- A.Halim

An essay on holy men and mystics can hardly be separated from one on cultural history, because mystics and holy men were most often scholars and torch-bearers of learning and at the same time scholars were invariably mystics of some sort. It has been observed that much of our knowledge of the cultural movements is… continue reading

अभागा दारा शुकोह- श्री अविनाश कुमार श्रीवास्तव

सोमवार 20 मार्च सन् 1615 की रात्रि में, मेवाड़ की सफलता के एक मास पश्चात्, भारतवर्ष की ऐतिहासिक नगरी अजमेर में राजकुमार खुर्रम की प्रियतमा मुमताज महल ने शाहजहाँ के सब से प्रिय, सबसे विद्वान् पर सबसे अभागे द्वारा शुकोह को जन्म दिया। बाबा का दिया हुआ ‘मुहम्मद दारा शुकोह’ का नाम, पिता का दिया… continue reading

गुजरात के सूफ़ी कवियों की हिन्दी-कविता-अम्बाशंकर नागर

गुजरात ने हिन्दी भाषा और साहित्य की अभिवृद्धि में प्रशंसनीय योग दिया है, यहां के वैष्णव कवियों ने ब्रजभाषा में, साधु-संतों ने सधुक्कड़ी हिन्दी में, राजाश्रित चारणों ने डिंगल में और सूफ़ी संतों ने हिन्दवी या गूजरी-हिन्दी में सुन्दर साहित्य का सृजन किया है। गुजरात के सूफ़ी कवियों और उनकी कृतियों के अध्ययन की ओर… continue reading

Characteristics of the Chishtia Silsila-Maikash Akbarabadi

SUFIS have never been negligent towards their duty as preachers of high morals and spirituality. They have always considered themselves responsible for the reform of the whole of mankind, irrespective of caste and creed, race and religion, and have considered every community of the worlds as deserving of their love and compassion. In the very… continue reading

हज़रत सय्यद शाह फ़रीदुद्दीन अहमद चिश्ती

कमालाबाद अल-मा’रूफ़ ब-काको अपनी क़दामत और हिदायत-ओ-लियाक़त के लिहाज़ से हमेशा मुमताज़ रह है। यहाँ मशहूर वलिय्या हज़रत मख़्दूमा बी-बी हद्या अ’ल-मारूफ़ ब-कमाल क़ुद्दिसा सिर्रहा का आस्ताना-ए-मुतबर्रका मुल्क भर में मशहूर है। कसरत से बंदगान-ए-ख़ुदा इस दर पे आ कर मन की मुराद पाकर ब-खु़शी वापस होते हैं। ये जगह हज़रत बी-बी कमाल की दामन-ए-मोहब्बत… continue reading