Articles By Sufinama Archive

Sufinama Archive is an initiative to reproduce old and rare published articles from different magazines specially on Bhakti movement and Sufism.

When Acharya Ramchandra Shukla met Surdas ji (भक्त सूरदास जी से आचार्य शुक्ल की भेंट)

यह नक्षत्रों से भरा आकाश वियोगी जनों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है। उस दिन भी तो आकाश नक्षरों से भरा हुआ था और मैं उस सुनील नभ के प्रत्येक तारे में अपनी प्रिया के रूप-वैभव की गरिमा देखने में तल्लीन होकर, महादेवी जी की यह पंक्ति- सो रहा है विश्व पर प्रिय तारकों… continue reading

Mystic Lipstick and Meera(मिस्टिक लिपिस्टिक और मीरा)

डर्हम के बिशप को भी विक्टोरिया के समय में कहना पड़ा था कि “मिस्टिक लोगों में ‘मिस्ट’ नहीं है। वह बहुत साफ़ साफ़ देखते हैं और कहते हैं।” पश्चिम में इसका सब से बड़ा प्रमाण विलियम लौ की ‘सीरियस कौल’ नामी पुस्तक है जिसने अठारवीं सदी में भी इंग्लिस्तान में धर्म की धारा बहाई और… continue reading

अल-ग़ज़ाली की ‘कीमिया ए सआदत’ की पहली क़िस्त

पारसमणि का मूल आधार है ‘कीमिया ए सआदत’ इसके लेखक मियां मुहम्मद ग़ज़ाली साहब ईरान के एक सुप्रसिद्ध सन्त थे। उनका पूरा नाम था हुज्जतुल इस्लाम अबू हमीद मुहम्मद इब्न-मुहम्मद-अल-तूसी, किन्तु सामान्यतया वे इमाम ग़ज़ाली के नाम से सुप्रसिद्ध है। इनका जन्म सन् 1054 ई. (450 हिज्री) में खुरासान प्रान्त के अन्तर्गत तूस नामक गाँव… continue reading

महाराष्ट्र के चार प्रसिद्ध संत-संप्रदाय- श्रीयुत बलदेव उपाध्याय, एम. ए. साहित्याचार्य

भारतवर्ष में संत-महात्माओं की संख्या जिस प्रकार अत्यंत अधिक रही है, उसी प्रकार उन के द्वारा स्थापित सम्प्रदायों की भी संख्या बहुत ही अधिक है। समग्र भारत के संप्रदायों के संक्षिप्त वर्णन के लिए कितने ही बड़े बड़े ग्रंथों की जरूरत पड़ेगी। वह भी किसी एक विद्वान् के मान की बात नहीं। इस लेख में… continue reading

हाफ़िज़ की कविता – शालिग्राम श्रीवास्तव

हिन्दी जाननेवालों को फ़ारसी-किवता के रसास्वादन के लिए पहले दो-एक मोटी मोटी बातों की हृदयस्थ कर लेना चाहिए। फ़ारस या ईरान में मुसलमानों के आगमन से पहले आमोद-प्रमोद को सामग्री में शराब का विशेष स्थान था। जगह जगह बड़े-बड़े शराबखाने खुले हुए थे, जिनको मैक़दा वा ख़राबात, उनके अध्यक्ष को पीरेमुग़ाँ, और उनमें काम करनेवाले… continue reading

खुसरो की हिंदी कविता – बाबू ब्रजरत्नदास, काशी

तेहरवीं शताब्दी के आरंभ में, जब दिल्ली का राजसिंहासन गुलाम वंश के सुल्तानों के अधीन हो रहा था, अमीर सैफुद्दीन नामक एक सरदार  बल्ख़ हज़ारा से मुग़लों के अत्याचार के कारण भागकर भारत आया और एटा के पटियाली नामक ग्राम में रहने लगा। सौभाग्य से सुल्तान शम्सुद्दीन अल्तमश के दरबार में उसकी पहुँच जल्दी हो… continue reading