हिन्दुस्तानी मौसीक़ी और अमीर ख़ुसरौ

इंसानी जज़्बात के इज़हार के लिए इंसान ने जिन फ़ुनून को वज़ा’ किया है उनमें से एक अज़ीमुश्शान फ़न इ’ल्म-ए-मौसीक़ी है। क़ुदरत के कारोबार में हर जगह मौसीक़ी के अ’नासिर नज़र आते हैं। चुनाँचे चश्मों का क़ुलक़ुल, झरनों का जल-तरंग, परिंदों की चहचहाहट, हवाओं की सरसराहाट, बिजली की गरज, बारिश का रिदम, मौजों का शोर,… continue reading