पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा “सय्यद शाह मोहम्मद यूसुफ़ बल्ख़ी फ़िरदौसी”

बचपन ही से यूसुफ़ बल्ख़ी बहुत होनहार थे ।उनकी बड़ी बेटी क़मरुन्निसा बल्ख़ी फ़िरदौसी अपने वालिद-ए-माजिद का ज़िक्र करते हुए फ़रमाती हैं कि

“मेरे वालिद माजिद रहमतुल्लाहि अ’लैहि दुबले-पुतले और लंबे थे। लिबास में पाजामा-कुर्ता और टोपी पहना करते। मेहमान-नवाज़ी का बड़ा शौक़ था इसलिए अगर कोई दोस्त मज़ाक़ से भी ये कह देता कि भाई यूसुफ़ रहमानिया होटल सब्ज़ी बाग़ गए हुए कई दिन हो गए तो अब्बा जान मोहतरम उसे फौरन कहते जल्दी चलो जल्दी चलो मैं तुम्हें रहमानिया होटल ले जाता हूँ। अंग्रेज़ी और फ़ारसी में काफ़ी महारत हासिल थी। फ़ारसी और अंग्रेज़ी में घंटों बातें किया करते थे जिसमें उनके अंग्रेज़ी दोस्त होते जिनसे वो बिला झिझक अंग्रेज़ी में बातें किया करते थे। शे’र-ओ-शाइ’री से भी काफ़ी शग़्फ़ था।

हिन्दुस्तानी क़व्वाली के विभिन्न प्रकार

हिंदुस्तान में क़व्वाली सिर्फ़ संगीत नहीं है। क़व्वाली इंसान के भीतर  एक संकरे मार्ग का निर्माण करती है जिसमे एक तरफ़ खुद को डालने पर दूसरी और ईश्वर मिलता है। क़व्वाली की विविध विधाएं हिंदुस्तान में प्रचलित रही हैं। ये विधाएं क़व्वाली के विभिन्न अंग हैं जो कालान्तर में क्रमित विकास द्वारा स्थापित हुई हैं।… continue reading

Gems of Persian Sufi poetry

फ़ारसी सूफ़ी काव्य का पहला शाइ’र हज़रत अबू सईद अबुल ख़ैर (सन-997-1049 ई.) को माना जाता है। इन्हों ने ही फ़ारसी काव्य में सबसे पहले ईश्वरीय प्रेम की अभिव्यंजना की.इनके विचार बड़े गहन हैं। सांसारिक वस्तुओं में उन्हें हक़ीक़ी महबूब के रूप की छटा दृष्टिगोचर होती है। ईश्वर से लौ लग जाने के पश्चात लौकिक… continue reading

Chishti Sufis and the Idea of Co-existence

Sufis, the people of love, peace and harmony were the examples of co-existence. In this essay, I am intended to quote some instances of the lives of Chishti Sufis which reflect upon the practices they carried out to materialize the idea of co-existence. When Khwaja Moinuddin Chishti, a renowned Sufi, reached Ajmer, the region was… continue reading

Hazrat Syedna Shah Ameer Abul Ula

सूफ़िया-ए-किराम ने मख़्लूक़-ए-ख़ुदा के सामने अपने क़ौल की बजाए अपनी शख़्सियत और किरदार को पेश किया, उन्होंने इन्सानों की नस्ल, तबक़ाती और मज़हबी तफ़रीक़ को देखे बग़ैर उनसे शफ़क़त-ओ-मुहब्बत का मुआमला रखा, जमाअत-ए-सूफ़िया के मुक़तदिर मशाएख़ में ऐसी भी हस्तियाँ हुईं जो अपने ला-फ़ानी कारनामों की वजह से मुमताज़-ओ-अदील हुईं जैसे ग्यारहवीं सदी हिज्री के… continue reading

हिन्दुस्तानी मौसीक़ी और अमीर ख़ुसरौ

इंसानी जज़्बात के इज़हार के लिए इंसान ने जिन फ़ुनून को वज़ा’ किया है उनमें से एक अज़ीमुश्शान फ़न इ’ल्म-ए-मौसीक़ी है। क़ुदरत के कारोबार में हर जगह मौसीक़ी के अ’नासिर नज़र आते हैं। चुनाँचे चश्मों का क़ुलक़ुल, झरनों का जल-तरंग, परिंदों की चहचहाहट, हवाओं की सरसराहाट, बिजली की गरज, बारिश का रिदम, मौजों का शोर,… continue reading