Articles By Faiz Ali Shah

हज़रत सय्यद शाह रफ़ी’उद्दीन क़ादरी मुहद्दिस अकबराबादी

शहर-ए-अकबराबाद के सूफ़िया-ए-किराम में जिन अव्वलीन शख़्सियतों ने ख़ानक़ाही ता’लीमात और तसव्वुफ़ को आ’म किया उनमें हज़रत सय्यद रफ़ी’उद्दीन मुहद्दिस का नाम आगरा की तारीख़ में सफ़हा-ए-अव्वल में आता है।सादात-ए-सफ़विया का तअ’ल्लुक़ हज़रत शाह सफ़ी से है जो एक सय्यद सहीहुन्नसब, आ’बिद, ज़ाहिद परेज़-गार उर्दबेल इ’लाक़ा आज़रबाईजान के थे। उज़लत का गोशा उनकी सब्र-ओ-क़नाअ’त से रौशन… continue reading

ख़्वाजा उ’स्मान हारूनी: सीरत, करामात,अक़्वाल-ओ-ता’लीमात

 (विलादत 526 या 510 हिज्री1129 ई’स्वी, विसाल 6 शव्वालुल-मुकर्रम 617 हिज्री 1220, 3 नवंबर)‘आँ इमाम-ए-अस्हाब-ए-विलाएत,आँ सुल्तान-ए-क़ाफ़िला-ए- हिदायत,आँ दाइम ब-मक़ाम-ए-मुशाहिदः-ए-बातिनी’(1) (बह्र-ए-ज़ख़ाइर, सफ़्हा 433) अल्लाह यूँ  तो हर दौर में वली पैदा फ़रमाता है जो दुनिया-ए-मा’रिफ़त का निज़ाम चलाते हैं लेकिन उसमें उ’रूज-ओ-ज़वाल कमी-ओ-बेशी आती रहती है। जो मरातिब तक़सीम होते हैं उनमें ज़माने के हलात-ओ-ज़रूरियात का… continue reading

ख़ानक़ाह हज़रत मैकश अकबराबादी,आगरा में संरक्षित सूफ़ी चित्रों का दुर्लभ संसार

ख़ानक़ाह शब्द फ़ारसी से लिया गया है जिसके मा’नी हैं ऐसी जगह जहाँ एक सूफ़ी सिलसिले के लोग किसी मुर्शिद के निर्देशन में आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं . यहाँ अध्यात्म पर चर्चाएं होती हैं और आपसी सद्भाव का सूफ़ी सदेश आम किया जाता है. हिंदुस्तान में सूफ़ी ख़ानक़ाहों का एक लम्बा और प्रसिद्द इतिहास… continue reading

आगरा में ख़ानदान-ए-क़ादरिया के अ’ज़ीम सूफ़ी बुज़ुर्ग

आगरा की सूफ़ियाना तारीख़ उतनी ही पुरानी है जितनी ख़ुद आगरा की।आगरा श्री-कृष्ण के दौर से ही मोहब्बत और रूहानियत का मर्कज़ रहा लेकिन मुस्लिम सूफ़ियाना रिवायत की इब्तिदा सुल्तान सिकंदर लोदी से होती है, जिसने आगरा को दारुल-सल्तनत बना कर अज़ सर-ए-नै ता’मीर किया। ये रौनक़ अकबर-ए-आ’ज़म और शाहजहाँ तक आते आते दो-बाला हो… continue reading