Amir Khusraw and his Adaptability – J. Dadademery

It is rare that a man excels in more than one facet of life.   Yet when he does, he leaves an indelible mark in the history of his country and often in the annals of the world. It is about one such towering personality that in my humble way I wish to speak today to… continue reading

सूफ़ी क़व्वाली में गागर

कोऊ आई सुघर पनिहार, कुआँ नाँ उमड़ चला
के तुम गोरी साँचे की डोरी. के तुम्ही गढ़ा रे सोनार
कुआँ नाँ उमड़ चला

Mulla Nasiruddin Modern Tales 10

“In tolerance, be like the sea”—a message of wholehearted acceptance that’s very much the need of the hour. Inscribed somewhere in Konya, on a wall. Believed to be a quote of Mevlana Rumi.

सतगुरू नानक साहिब

बाबा प्यारे! हमको ये बता कि आ’लिम और जाहिल में क्या फ़र्क़ है? इर्शाद हुआ:
“आ’लिम एक तालाब की मानिंद है।जाहिल और मुतअ’स्सिब लोग जो इर्फ़ान-ए-इलाही से बे-नसीब हैं मेंढ़क की तरह कीचड़ में फंसे हुए हैं।और आ’रिफ़ान-ए-अहदियत उस तालाब में कंवल के फूल हैं और तालिबान-ए-हक़ भँवरे हैं।
“मेंढ़क कंवल के पास ही रहता है लेकिन हक़ीक़त में हज़ारों कोस दूर है क्यूँकि कंवल की ख़ुशबू से बे-बहरा है।और भौंरा जंगल में रहता है मगर चूँकि वो ख़ुश्बू की लज़्ज़त और कंवल रस का शाएक़ होता है,दूर से आ कर लुत्फ़-ए-सोहबत उठाता है और तसल्ली-ए-राहत पाता है।”

हज़रत बाबा फ़रीद के ख़ुलफ़ा-प्रोफ़ेसर ख़लीक़ अहमद निज़ामी फ़रीदी

सियरुल-अक़्ताब के मुसन्निफ़ ने हज़रत बाबा फ़रीद के ख़ुलफ़ा की तादाद कसीर बताई है।मगर अमीर-ए-ख़ुर्द ने सिर्फ़ मुंदर्जा ज़ैल ख़ुल़फ़ा का हवाला दिया है। 1۔ शैख़ नजीबुद्दीन मुतवक्किल रहमतुल्लाहि अ’लैह 2۔ मौलाना बदरुद्दीन इस्हाक़ 3۔ शैख़ निज़ामुद्दीन औलिया 4۔ शैख़ अ’ली साबिर 5۔ शैख़ जमालुद्दीन हांसवी 7۔ शैख़ आ’रिफ़ 8۔ मौलाना फ़ख़्रुद्दीन सफ़ाहानी मुतअख़्ख़िरीन ने… continue reading