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बहादुर शाह और फूल वालों की सैर-जनाब मिर्ज़ा फ़रहतुल्लाह बेग देहलवी

सा’दी ’अलैहर्रहमा ने ख़ूब कहा है र’ईयत-ए-चू बीख़स्त-ओ-सुल्ताँ दरख़्त दरख़्त ऐ पिसर बाशद अज़ बीख़ सख़्त ये जड़ों ही की मज़्बूती थी कि दिल्ली का सर-सब्ज़-ओ-शादाब चमन अगरचे हवादिस-ए-ज़माना के हाथों पामाल हो चुका था और हलाकत की बिजलियों पर बाद-ए-मुख़ालिफ़ के झोंकों से सल़्तनत-ए-मुग़्लिया की शौकत-ओ-इक़्तिदार के बड़े बड़े टहने टूट-टूट कर गिर रहे… continue reading

Hazrat Syed Faiz-ur-Rasool (R.A)

Titles: Murshid-e-Yagana, Faiz Bakhsh-e-Zamana, Huzur Saiyedna Faiz ur Rasool (رحمة الله عليه). Birth: Hazrat was born in 1317 AH ( 1900 AD ). Parents:    His father was HazratSaiyed Faiyazuddin (R.A) and mother SaiyedaHifazatbibi (R.A). Hazrat was born of this couple, he grew up under his well qualified parents, they were fervent piety, dedicated to higher moral and spiritual values. They must… continue reading

’अज़ीज़ सफ़ीपुरी और उनकी उर्दू शा’इरी

उर्दू की तर्वीज-ओ-इशा’अत और फ़रोग़-ओ-इर्तिक़ा में सूफ़िया-ए-किराम ने जो ख़िदमात पेश कीं वो किसी साहिब-ए-नज़र से पोशीदा नहीं। इस ज़बान को ’अवाम के दरमियान मक़बूल बनाने और इसके अदबी सरमाए को वुस्’अत ’अता करने में उन ख़ुदा-रसीदा बुज़ुर्गों ने इब्तिदा ही से ग़ैर-मा’मूली कारनामे अंजाम दिए हैं। ये उन्हीं का फ़ैज़ान है कि ज़माना-ए-क़दीम ही… continue reading

हज़रत शाह वजीहुद्दीन ‘अलवी गुजराती-मौलाना सय्यद अबू ज़फ़र नदवी (मुदर्रिसः ’अरबी-ओ-फ़ारसी महाविद्यालय, अहमदाबाद)

गुजरात में सैकड़ों उ’लमा और अत्क़िया पैदा हुए और चल बसे लेकिन गुजरात के आसमान पर दो ऐसे आफ़ताब-ओ-माहताब चमके जिनके ’इल्मी कारनामों की शु’आऐं अभी तक परतव-फ़िगन हैं। उन में से एक मुहद्दिस-ए-बे-बदल ’अल्लामा शैख़ मोहम्मद ताहिर पटनी (गुजराती) हैं और दूसरी मुक़द्दस हस्ती हज़रत शाह वजीहुद्दीन ’अलवी गुजराती की है। इनसे पहले नेहरवाला… continue reading

लखनऊ का सफ़रनामा

लखनऊ के मुतअ’ल्लिक़ बृज नारायण चकबस्त ने बहुत पहले कहा था : ज़बान-ए-हाल से ये लखनऊ की ख़ाक कहती है मिटाया गर्दिश-ए-अफ़्लाक ने जाह-ओ-हशम मेरा दिल्ली के बा’द हिन्दुस्तान का उजड़ने वाला ये दूसरा शहर है। ब-क़ौल मिर्ज़ा हादी रुसवा: दिल्ली छुटी थी पहले अब लखनऊ भी छोड़ें दो शहर थे ये अपने दोनों तबाह… continue reading

ईद वाले ईद करें और दीद वाले दीद करें

अपनी ख़ुशियाँ भूल जा सब का दर्द ख़रीद
‘सैफ़ी’ तब जा कर कहीं तेरी होगी ईद