Holi aur Sufi Santo ka Maha Rang (होली और सूफ़ी-संतों का महारंग )

रंगों से हिंदुस्तान का पुराना रिश्ता रहा है. मुख़्तलिफ़ रंग हिंदुस्तानी संस्कृति की चाशनी में घुलकर जब आपसी सद्भाव की आंच पर पकते हैं तब जाकर पक्के होते हैं और इनमें जान आती है. यह रंग फिर ख़ुद रंगरेज़ बन जाते हैं और सबके दिलों को रंगने निकल पड़ते हैं. होली इन्हीं ज़िंदा रंगों का… continue reading

Mulla Nasruddin Modern Tales- 3

It was a smooth touchdown in Kuwait. After a brief wait, he boarded a flight to Delhi. Nasruddin was standing in the boarding queue, a burly man from the airport security team was having an intimate chat with a lissome ground staff. The security guy was from Swat valley, and the girl was from Chennai…. continue reading

The Prince and The Four Dervishes

The night sky was coal black; the Moon was hidden by a blanket of thick grey clouds, but the prince could see a fire burning at a distance. Four dervishes crouched around the flames to keep the howling icy wind at bay; the graves around them whispering stories of days gone by. One was a… continue reading

Malfuzat: An Analysis of the criticism on Anees-ul-Arwah

Malfuzat is generally defined as discourses, conversations and sermons delivered by Sufi in the assemblies of the learned persons and recorded by their disciples. Malfuzat-writing is one of the most important branch of Sufi literature as it contains the teachings of the leading Sufi figures of their time delivered in gatherings of their disciples and… continue reading

Mystic Lipstick and Meera(मिस्टिक लिपिस्टिक और मीरा)

डर्हम के बिशप को भी विक्टोरिया के समय में कहना पड़ा था कि “मिस्टिक लोगों में ‘मिस्ट’ नहीं है। वह बहुत साफ़ साफ़ देखते हैं और कहते हैं।” पश्चिम में इसका सब से बड़ा प्रमाण विलियम लौ की ‘सीरियस कौल’ नामी पुस्तक है जिसने अठारवीं सदी में भी इंग्लिस्तान में धर्म की धारा बहाई और… continue reading

अल-ग़ज़ाली की ‘कीमिया ए सआदत’ की पहली क़िस्त

पारसमणि का मूल आधार है ‘कीमिया ए सआदत’ इसके लेखक मियां मुहम्मद ग़ज़ाली साहब ईरान के एक सुप्रसिद्ध सन्त थे। उनका पूरा नाम था हुज्जतुल इस्लाम अबू हमीद मुहम्मद इब्न-मुहम्मद-अल-तूसी, किन्तु सामान्यतया वे इमाम ग़ज़ाली के नाम से सुप्रसिद्ध है। इनका जन्म सन् 1054 ई. (450 हिज्री) में खुरासान प्रान्त के अन्तर्गत तूस नामक गाँव… continue reading