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हज़रत मख़दूम हुसैन ढकरपोश

बिहार-ओ-बंगाल के अव्वलीन सूफ़िया ज़्यादा-तर सुहरवर्दी निस्बत से मा’मूर हैं।कहा जाता है फ़ातिह-ए-मनेर हज़रत इमाम मुहम्मद ताज फ़क़ीह और उनके पोते मख़दूम कमालुद्दीन अहमद यहया मनेरी और उनके ख़ुस्र मुअ’ज़्ज़म हज़रत सय्यद शहाबुद्दीन पीर-ए-जगजोत ये सब सुहरवर्दी सिल्सिले से वाबस्ता थे।वहीं दूसरी तरफ़ हज़रत पीर-ए-जगजोत के नवासा मख़दूम अहमद चर्मपोश और मख़दूमा बीबी कमाल (काको)… continue reading

حضرت شاہ تیغ علی

مشائخ سلسلہ عالیہ قادریہ میں حضرت صوفی شاہ آبادانی سیالکوٹی رحمۃ اللہ علیہ (م18/ربیع الثانی 1220 ھ) کی شخصیت بھی کافی اہمیت کی حامل ہے۔ اواخر بارہویں صدی ہجری سے اوائل تیرہویں صدی ہجری تک آپ کا فیضان شمالی ہند میں عام تھا۔ حضرت سیدنا شیخ احمد سرہندی المعروف بہ  مجددالف ثانی کے بعد آپ… continue reading

समकालीन खाद्य संकट और ख़ानक़ाही रिवायात

आज दुनिया संगीन क़िस्म के ग़िज़ाई बोहरान से नबर्द-आज़मा है, जदीद टेक्नॉलोजी के दौर में तरक़्क़ियाती दा’वों के बा’द भी आ’लमी सतह पर ग़िज़ा की शदीद क़िल्लत के सबब भूक से होने वाली अमवात की शरह में तश्वीश-नाक हद तक इज़ाफ़ा होता जा रहा है और भूक आ’लमी मसाएल में एक संगीन सूरत इख़्तियार कर… continue reading

The Idea of India in Amir Khusrau

How great is this land which produces men
Who deserve to be called men!

ख़ानक़ाह-ए-मनेर शरीफ़

अ’ब्दुर रहीम ख़ानख़ाना और इब्राहिम ख़ाँ कांकड भी आपके मुरीद थे। राजा मान सिंह और तानसेन आपके मो’तक़िद थे और अक्सर यह लोग आपकी ख़िदमत में मनेर शरीफ़ आया करते थे।

आज रंग है !

रंगों से हिंदुस्तान का पुराना रिश्ता रहा है. मुख़्तलिफ़ रंग हिंदुस्तानी संस्कृति की चाशनी में घुलकर जब आपसी सद्भाव की आंच पर पकते हैं तब जाकर पक्के होते हैं और इनमें जान आती है. यह रंग फिर ख़ुद रंगरेज़ बन जाते हैं और सबके दिलों को रंगने निकल पड़ते हैं. होली इन्हीं ज़िंदा रंगों का त्यौहार है.