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हज़रत शैख़ अ’लाउ’द्दीन क़ुरैशी-ग्वालियर में नवीं सदी हिज्री के शैख़-ए-तरीक़त और सिल्सिला-ए-चिश्तिया के बानी

हिन्दुस्तान की तारीख़ भी कितनी अ’ज़ीब तारीख़ है। यहाँ कैसी कैसी अ’दीमुन्नज़ीर शख़्सियतें पैदा हुईं। इ’ल्म-ओ-इर्फ़ान के कैसे कैसे सोते फूटे।
हिंदुस्तान से अ’रब का तअ’ल्लुक़ एक क़दीम तअ’ल्लुक़ है। मशाएख़ीन-ए-तरीक़त ने अपनी बे-दाग़ ज़िंदगी यहाँ अ’वाम के सामने रखी। यहाँ की बोलियों में उनसे कलाम किया।

ख़ानक़ाह-ए-फुलवारी शरीफ़ के मरासिम-ए-उ’र्स

फुलवारी की ख़नाकाह और सज्जादा-ओ-सिलसिला-ए-हज़रत ताजुल-आ’रिफ़ीन आ’फ़्ताब-ए-तरीक़त मख़दूम शाह मोहम्मद मुजीबुल्लाह क़ादरी क़लंदर फुलवारवी की ज़ात-ए-बा-बरकात से वाबस्ता और उन्हीं के नाम-ए-नामी पर मौसूम है। ज़ैल में उस ख़ानकाह के मा’मूलात-ओ-मरासिम-ए-उ’र्स हदिया -ए-नाज़िरीन किए जाते हैं।यहाँ आ’रास की तक़रीबें मुतअ’द्दिद और ब-कसरत होती हैं लेकिन सब से पहला और मुक़द्दस और सब से ज़ियादा मुहतम-बिश्शान… continue reading

ताजुल-आ’रिफ़ीन मख़दूम शाह मुजीबुल्लाह क़ादरी – शुऐ’ब रिज़वी मुजीबी फुलवारवी

आप ख़ानदान-ए-जा’फ़रिया के बेहतरीन अहफ़ाद से हैं। आपका ख़ानदान सूबा-ए-बिहार के उस मुतबर्रक क़स्बा फुलवारी में (जो अ’ज़ीमाबाद से 6 कोस के फ़ासिला पर जानिब –ए-मग़्रिब वाक़ि’ है) चार-सौ बरस से आबाद है और हमेशा इ’ल्म-ओ-फ़ज़्ल में यगाना-ए-रोज़गार रहा। दसवीं सदी हिज्री के इब्तिदा में ताजुल-आ’रिफ़ीन के जद्द-ए-आ’ला हज़रत शाह सा’दुल्लाह जा’फ़री ज़ैनबी ने (जो… continue reading

अल्बेरूनी -प्रोफ़ेसर मुहम्मद हबीब

अल्बेरूनी का पूरा नाम था अबू रैहान मुहम्मद इब्न-ए-अहमद अल्बेरूनी। उस का जन्म ख़्वारज़्म में 973 सदी ईस्वी में हुआ था। अपने जन्म स्थान में रहते हुए ही उस ने राजनीति में तथा विज्ञान और साहित्य में अच्छी ख़्याति प्राप्त कर ली थी। परंतु अन्य मध्य एशियाई राज्यों की भाँति ख़्वारज़्म भी सुल्तान महमूद की… continue reading

अमीर ख़ुसरो- तहज़ीबी हम-आहंगी की अ’लामत-डॉक्टर अनवारुल हसन

हिन्दुस्तान ज़माना-ए-क़दीम से अपनी रंग-बिरंगी तहज़ीब के लिए एशिया के मुल्कों में इम्तियाज़ी हैसियत का हामिल रहा है।ग़ैर मुल्की अक़्वाम की आमद से यहाँ के तहज़ीबी सरमाया में नए धारे शामिल होते रहे और उनके असरात हमेशा रू-नुमा होते रहे।क़ुदरत से भी इस मुल्क को जुग़्राफ़ियाई ए’तबार से मुतनव्विअ’आब-ओ-हवा मिली है जिसके नुक़ूश कश्मीर से… continue reading

हिन्दुस्तानी तहज़ीब की तश्कील में अमीर ख़ुसरो का हिस्सा- मुनाज़िर आ’शिक़ हरगानवी

जब हम हिन्दुस्तान की तहज़ीब का मुतालिआ’ करते हैं तो देखते हैं कि तरह तरह के इख़्तिलाफ़ के बावजूद अहल-ए-हिंद के ख़याल, एहसास और ज़िंदगी में एक गहरी वहदत मौजूद है जो तरक़्क़ी के दौर में ज़्यादा और तनज़्ज़ुल के दौर में कम होती रहती है। अमीर ख़ुसरो 653 हिज्री में ब-मक़ाम-ए-पटियाली पैदा हुए और… continue reading