Articles By Sufinama

Sufism transcends religion, language, nationality and has, over the years, emerged as a unifying force that moves us beyond the physical realm, into a spiritual one. Sufinama is dedicated to the legend of #Sufis and #Saints of Indian Subcontinent and all over the world. #Sufinama. #Sufism

Qawwalon ke Qisse-7 Habeeb Painter Qawwal ka Qissa

भारत-चीन युद्ध के समय जब पूरा देश एकता के सूत्र में बंध गया था,उस नाज़ुक दौर में अवाम को जगाने और सैनिकों का हौसला बढ़ाने का बीड़ा क़व्वाल हबीब पेंटर ने उठाया। उनकी क़व्वालियों से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने हबीब पेंटर को बुलबुल-ए-हिन्द की उपाधि से सम्मानित किया ।हबीब… continue reading

Qawwalon ke Qisse-4 Murli Qawwal ka Qissa

लखनऊ के क़व्वाल कन्हैया के औलाद नहीं थी । वह अपने पीर साहब के हुज़ूर पेश हुए और उनसे अपनी यह परेशानी बताई । पीर साहब ने अर्ज़ किया – कन्हैया ! तेरे घर पर मुरली बजेगी ! और ऐसा ही हुआ । कन्हैया को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई । उन्होंने अपने बेटे का… continue reading

Qawwalon ke Qisse -3 Shankar-Shambhu Qawwal ka Qissa

शंकर शम्भू क़व्वाल का नाम आज कौन नहीं जानता । एक बार शंकर और शम्भू ख्व़ाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के उर्स पर हाज़िरी देने पहुंचे । उन्हें वहां गाने का मौका नहीं दिया गया क्यूंकि एक तो वह नए थे और दुसरे क़व्वालों की एक लंबी फ़ेहरिश्त कतार में खड़ी थी । यह देखकर बड़े भाई… continue reading

Qawwalon ke Qisse-2 Nusrat Sahab ka Qissa

एक बार नुसरत साहब नींद में एक घंटा गाते रहे।जब नींद खुली तो उन्होंने बताया कि ख्व़ाब में वह किसी मज़ार पर थे जहाँ उनके पिता फ़तेह अ’ली ख़ान साहब ने उन्हें कलाम पढ़ने का हुक्म दिया।इस घटना को घर के बड़े लोगों ने एक रूहानी संकेत के तौर पर लिया और नुसरत साहेब को… continue reading

Holi aur Sufi Santo ka Maha Rang (होली और सूफ़ी-संतों का महारंग )

रंगों से हिंदुस्तान का पुराना रिश्ता रहा है. मुख़्तलिफ़ रंग हिंदुस्तानी संस्कृति की चाशनी में घुलकर जब आपसी सद्भाव की आंच पर पकते हैं तब जाकर पक्के होते हैं और इनमें जान आती है. यह रंग फिर ख़ुद रंगरेज़ बन जाते हैं और सबके दिलों को रंगने निकल पड़ते हैं. होली इन्हीं ज़िंदा रंगों का… continue reading

Jamaali – The second Khusrau of Delhi (जमाली – दिल्ली का दूसरा ख़ुसरो)

सूफ़ी-संतों ने हमें सिर्फ़ जीवन जीने की राह ही नहीं बतायी बल्कि अपने पीछे वह अपना विपुल साहित्य भी छोड़ गए जिनसे आने वाली पीढियाँ फैज़ हासिल करती रहीं. सूफ़ी-संतों का साहित्य पढ़कर बमुश्किल यक़ीन होता है कि उस दौर में उनके उठाये गए प्रश्न और उन प्रश्नों पर उनके विचार आज भी उतने ही… continue reading

Sheikh Naseeruddin Chiragh i Dehli

ग़यासपुर स्थित हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह- गर्मियों का मौसम था और दिल्ली गर्म तवे की तरह तप रही थी । दोपहर की इस चिलचिलाती धूप में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह के जमआत खाने में यह समय ख़ादिमों, मुरीदों और राहगीरों के सुस्ताने का समय होता था । जमआत खाना लोगों से खचाखच भरा… continue reading

Tana Re Tana -Sufinama Studio

Sufinama is dedicated to highlighting the legacy of Sufis – their message of tolerance, compassion and integrity. And as we journey to our souls today and look inward, it gives us great pleasure to announce our new song with video. It is a labour of love. It is our tribute to the masters. Sufis have… continue reading

Fawaid ul fuwaad (Morals For The Heart) – Book review

तसव्वुफ़ में साहित्य के विशाल भंडार को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है । मक्तूबात (पत्र ), तज़किरा (जीवनवृत) एवं मल्फ़ूज़ात (उपदेश)। मक्तूबात के अंतर्गत उन पत्रों का संकलन आता है जो सूफी संतों ने अपने  मुरीदों और समकालीन संतों को लिखे हैं  । तज़किरे के अंतर्गत जीवनवृत संग्रह आता है जो… continue reading

Khwaja Muinuddin’s Seven Illuminating Letters To his Spiritual Successor

A veritable mine of “Game of Wisdom” In this Blog, we reproduce seven of the most illuminating and thought-provoking letters on the cult of Sufism which Hazrat Khwaja Muinuddin Chishti affectionately wrote from Ajmer to his Khalifa (spiritual successor) Khawaja Qutubuddin Bakhtiyar kaki (may peace of God be upon his soul) who was the accredited… continue reading