online casino india

हज़रत पीर नसीरुद्दीन “नसीर”

“बात इतनी है और कुछ भी नहीं” हज़रत पीर नसीरुद्दीन ‘नसीर’ मशहूर शाइर, अदीब, रिसर्चदाँ, ख़तीब, आलिम और गोलड़ा शरीफ़ की दरगाह के सज्जादा-नशीन थे। वो उर्दू, फ़ारसी, पंजाबी के साथ-साथ अरबी, हिन्दी, पूरबी और सरायकी ज़बानों में भी शाइरी करते थे, इसीलिए उन्हें “सात ज़बानों वाला शाइर” के नाम से भी याद किया जाता… continue reading

शाह नियाज़ बरैलवी ब-हैसिय्यत-ए-एक शाइ’र- हज़रत मैकश अकबराबादी

अक्सर अहल-ए-कमाल ऐसे होते हैं जिनमें चंद कमालात मुज्तमा’ हो जाते हैं मगर बा’ज़ कमाल इस दर्जा नुमायाँ होते हैं कि उनके दूसरे कमालात उन कमालात में मह्व हो कर रह जाते हैं ।मसलन हकीम मोमिन ख़ाँ का तिब्ब और नुजूम शाइ’री में दब कर रह गया, ज़ौक़ और मीर का इ’ल्म-ओ-फ़ज़्ल शाइ’री में गुम… continue reading

हज़रत सय्यद शाह अमीन अहमद फ़िरदौसी

किसी भी शै को मुमताज़ और ख़ुश-गवार बनाने के लिए ग़ैर मा’मूल सिफ़त का होना ज़रूरी होता है ख़ाह वो शाहाँ-ए-ज़माना हो या सूफ़िया-ए-किराम जिनकी हसीन तर ज़िंदगी या’नी अख़्लाक़-ओ-किर्दार की बिना पर वो शहर-ए-जहाँ ये बस्ते हैं मुम्ताज़ होती है,इस तरह इमतिदाद-ए-ज़माना के बा’द रफ़्ता-रफ़्ता उन शाहों के रसूख़ में कमी आने लगती है… continue reading

THE KHAN KHANAN AND HIS PAINTERS, ILLUMINATORS AND CALLIGRAPHERS- M. MAHFUZ UL HAQ .

WE know so little about the life-history of the artists of the period of Akbar and Jahangir—nay, of the Mughal artists in general—that even a scrap of paper, which may throw light on the biography of these artists, is of value to a student of Mughal art. Writers on Mughal painting have ordinarily made use… continue reading

SHAH GHARIB ALLAH OF CHITTAGONG -ABDUL KARIM

At a little distance to the north of Chittagong town there is, on a hill top, a grave enclosed in mud walls and roofed over by C. I. sheets The grave is an object of veneration and local people visit the place in large numbers, particularly on the days of Muslim festivals. According to tradition… continue reading

Mystics of the sayyid Lodi period (1414 AD. To 1526 AD. )- A.Halim

An essay on holy men and mystics can hardly be separated from one on cultural history, because mystics and holy men were most often scholars and torch-bearers of learning and at the same time scholars were invariably mystics of some sort. It has been observed that much of our knowledge of the cultural movements is… continue reading