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हज़रत शरफ़ुद्दीन अहमद मनेरी रहमतुल्लाह अ’लैह

ज़िक्र से मुराद ख़ुदा-वंद तआ’ला की याद है। इसकी चार क़िस्में हैं: 1 ज़बान पर हो लेकिन दिल में न हो, 2 ज़बान और दिल दोनों में हो, मगर दिल किसी वक़्त उससे ग़ाफ़िल हो जाता हो, लेकिन ज़बान पर जारी हो, 3 ज़बान और दिल में बराबर हो, 4 दिल में हो और ज़बान ख़ामोश हो।

Modern Tales Of Mulla Naseeruddin-11

Every morning she went out to ‘meet’ the Mevlana. Read Coleman Barks’ translation of Mevlana’s works and Brad Gooch’s account of Rumi’s life for hours while sitting on the floor. I did the same for almost six hours the previous day there, so I could feel the way she had felt.

हज़रत शैख़ फ़ख़्रुद्दीन इ’राक़ी रहमतुल्लाह अ’लैह

नाम-ओ-नसबः- पूरा नाम शैख़ फ़ख़्रुद्दीन इब्राहीम है।तारीख़-ए-गुज़ीदा में सिलसिला-ए-नसब ये है।फ़ख़्रुद्दीन इब्राहीम बिन बज़रचमहर बिन अ’ब्दुल ग़फ़्फ़ार अल-जवालक़ी।मगर तज़्किरा-ए-दौलत शाह,मिर्अतुल-ख़याल,सीरतुल-आ’रिफ़ीन,मख़्ज़नुल-ग़राएब और ब्रिटिश म्यूज़ियम के फ़ारसी मख़्तूतात की फ़िहरिस्त में उनके वालिद-ए-बुज़ुर्गवार का इस्म-ए-गिरामी शहरयार मरक़ूम है।सियरुल आ’रिफ़ीन के मुअल्लिफ़ का बयान है कि- “शैख फ़ख़्रुद्दीन मोहम्मद शहरयार बहाउद्दीन ज़करिया की बहन के बेटे या’नी भाँजे… continue reading

अयोध्या की राबिया-ए-ज़मन – हज़रत सय्यदा बड़ी बुआ

हिन्दुस्तान यूँ तो हमेशा सूफ़ियों और दरवेशों का अ’ज़ीम मरकज़ रहा है।इन हज़रात-ए-बा-सफ़ा ने यहाँ रहने वालों को हमेशा अपने फ़ुयूज़-ओ-बरकात से नवाज़ा है और ता-क़यामत नवाज़ते रहेंगें। इन्हीं बा-सफ़ा सूफ़ियों में हज़रत बीबी क़ताना उ’र्फ़ बड़ी बुआ साहिबा रहमतुल्लाहि अ’लैहा का नाम सर-ए-फ़िहरिस्त आता है। आप अपने वक़्त की मशहूर आ’बिदा, ज़ाहिदा ख़ातून थीं।आपको… continue reading

हज़रत शैख़ सदरुद्दीन आ’रिफ़ रहमतुल्लाह अ’लैह

वालिद-ए-बुज़ुर्गवार के विसाल के बा’द जब रुश्द-ओ-हिदायत की मसनद पर मुतमक्किन हुए तो तर्का में सात लाख नक़्द मिले। मगर ये सारी रक़म एक ही रोज़ में फ़ुक़रा-ओ-मसाकीन में तक़्सीम करा दी और अपने लिए एक दिरम भी न रखा। किसी ने अ’र्ज़ की कि आपके वालिद-ए-बुज़ुर्गवार अपने ख़ज़ाने में नक़्द-ओ-जिंस जम्अ’ रखते थे और उसको थोड़ा थोड़ा सर्फ़ करना पसंद करते थे।आपका अ’मल भी उन्हीं की रविश के मुताबिक़ होना चाहिए था।शैख़ सदरुद्दीन रहमतुल्लाह अ’लैह ने इर्शाद फ़रमाया कि हज़रत बाबा दुनिया पर ग़ालिब थे, इसलिए दौलत उनके पास जम्अ’ हो जाती तो उनको अ’लाइक़-ए-दुनिया का कोई ख़तरा लाहिक़ न होता, और वो दौलत को थोड़ा थोड़ा ख़र्च करते थे। मगर मुझ में ये वस्फ़ नहीं, इसलिए अंदेशा रहता है कि दुनिया के माल के सबब दुनिया के फ़रेब में मुब्तला न हो जाऊँ,इसलिए मैं ने सारी दौलत अ’लाहिदा कर दी।

हज़रत शैख़ बहाउद्दीन ज़करिया सुहरावर्दी रहमतुल्लाह अ’लैह

राहतुल-क़ुलूब (मल्फ़ूज़ात-ए-हज़रत बाबा गंज शकर) में है कि जिस वक़्त हज़रत बहाउद्दीन ज़करिया का विसाल हुआ, उसी वक़्त अजोधन में हज़रत बाबा गंज शकर बेहोश हो गए।बड़ी देर के बा’द होश आया तो फ़रमाया कि-
“बिरादरम बहाउद्दीन ज़करिया रा अज़ीं बयाबान-ए-फ़ना ब-शहरिस्तान-ए-बक़ा बुर्दंद”