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Hazrat Syed Faiz-ur-Rasool (R.A)

Titles: Murshid-e-Yagana, Faiz Bakhsh-e-Zamana, Huzur Saiyedna Faiz ur Rasool (رحمة الله عليه). Birth: Hazrat was born in 1317 AH ( 1900 AD ). Parents:    His father was HazratSaiyed Faiyazuddin (R.A) and mother SaiyedaHifazatbibi (R.A). Hazrat was born of this couple, he grew up under his well qualified parents, they were fervent piety, dedicated to higher moral and spiritual values. They must… continue reading

ख़ानदान-ए-चिराग़ देहलवी

हज़रत ख़्वाजा नसीरुद्दीन चिराग़ देहलवी शैख़-उल-मशाइख़, बादशाह-ए-’आलम-ए-हक़ीक़त , कान-ए-मोहब्बत-ओ-वफ़ा हज़रत ख़्वाजा नसीरुल-मिल्लत वद्दीन महमूद अवधी रहमतुल्लाह अ’लैह। तकमिला-ए-सियर-उल-औलिया में है कि ’इल्म-ओ-’अक़्ल-ओ-’इश्क़ में आपका ख़ास मक़ाम था। मकारिम-ए-अख़्लाक़ में आपका काई सानी न था। जानशीन:– आप हज़रत महबूब-ए-इलाही के ख़लीफ़ा-ओ-जानशीन थे। वालिद-ए-बुज़ुर्गवार:– आपके वालिद-ए-माजिद का नाम सय्यद यहया यूसुफ़ था। आपके जद्द-ए-मोहतरम का हिंदुस्तान वारिद… continue reading

नज़ीर की सूफ़ियाना शा’इरी

’इल्म-ए-तसव्वुफ़ जिसकी निस्बत कहा जाता है, बरा-ए-शे’र गुफ़्तन ख़ूब अस्त’ –मौलाना अलताफ़ हुसैन हाली “यादगार-ए-ग़ालिब” उर्दू शा’इरी की इब्तिदा में जिन शो’रा का कलाम तहक़ीक़ में, तारीख़ी तज़्किरों में मिलता है वो या तो सूफ़ी थे या सूफ़ियों से फ़ैज़-याब अश्ख़ास। सूफ़िया की इब्तिदाई ता’लीमात में क्यूँकि इ’श्क़ को ज़रिआ’-ए-नजात और तअ’ल्लुक़-इलल्लाह का ज़रिआ’ समझा… continue reading

हज़रत सय्यद तसद्दुक़ अ’ली असद अमजदी

हज़रत मौलाना सय्यद तसद्दुक़ अ’ली सुल्तान असद का वतन शहर-ए- मेरठ सय्यदवाड़ा मुहल्ला अंदरकोट, इस्माई’ल नगर है। आपका नसब-नामा 35 वीं पुश्त में हज़रत इमाम जा’फ़र-ए-सादिक़ से जा मिलता है। आपके आबा-ओ-अज्दाद अफ़्ग़ानिस्तान से सुल्तान महमूद ग़ज़नवी के हमराह हिन्दुस्तान तशरीफ़ लाए। इस ख़ानवादे के लोग ग़ैर मुनक़सिम हिंदुस्तान के मुख़्तलिफ़ इ’लाक़ों मऊ, शम्साबाद, रावलपिंडी… continue reading

हज़रत मख़्दूम सय्यद शाह दरवेश अशरफ़ी चिश्ती बीथवी

हज़ारों साल तक ही ख़िदमत-ए-ख़ल्क़-ए-ख़ुदा कर के ज़माने में कोई एक बा-ख़ुदा दरवेश होता है इस ख़ाकदान-ए-गेती पर हज़ारों औलिया-ए-कामिलीन ने तशरीफ़ लाकर अपने हुस्न-ए-विलायत से इस जहान-ए-फ़ानी को मुनव्वर फ़रमाया और अपने किरदार-ए-सालिहा से गुलशन-ए-इस्लाम के पौदों को सर-सब्ज़-ओ-शादाब रखा। अगर ग़ज़नवी-ओ-ग़ौरी जैसे मुबल्लिग़-ए-आ’ज़म सलातीन के अहम मा’रकों को हम फ़रामोश नहीं कर सकते… continue reading

आज रंग है !

रंगों से हिंदुस्तान का पुराना रिश्ता रहा है. मुख़्तलिफ़ रंग हिंदुस्तानी संस्कृति की चाशनी में घुलकर जब आपसी सद्भाव की आंच पर पकते हैं तब जाकर पक्के होते हैं और इनमें जान आती है. यह रंग फिर ख़ुद रंगरेज़ बन जाते हैं और सबके दिलों को रंगने निकल पड़ते हैं. होली इन्हीं ज़िंदा रंगों का त्यौहार है.