Nizamuddin Auliya to Amir Khusro: I am weary of everyone, even myself, but never of you

Amir Khusro would pray most of the night. Once his master Nizamuddin Auliya asked him: “Turk, what is the state of being occupied?” “There are times at the end of the night when one is overcome by weeping,” he replied. “Praise be to God, bit by bit is being manifest,” Nizamuddin said. But what was… continue reading

Malfuzat: An Analysis of the criticism on Anees-ul-Arwah

Malfuzat is generally defined as discourses, conversations and sermons delivered by Sufi in the assemblies of the learned persons and recorded by their disciples. Malfuzat-writing is one of the most important branch of Sufi literature as it contains the teachings of the leading Sufi figures of their time delivered in gatherings of their disciples and… continue reading

Mystic Lipstick and Meera(मिस्टिक लिपिस्टिक और मीरा)

डर्हम के बिशप को भी विक्टोरिया के समय में कहना पड़ा था कि “मिस्टिक लोगों में ‘मिस्ट’ नहीं है। वह बहुत साफ़ साफ़ देखते हैं और कहते हैं।” पश्चिम में इसका सब से बड़ा प्रमाण विलियम लौ की ‘सीरियस कौल’ नामी पुस्तक है जिसने अठारवीं सदी में भी इंग्लिस्तान में धर्म की धारा बहाई और… continue reading

अल-ग़ज़ाली की ‘कीमिया ए सआदत’ की पहली क़िस्त

पारसमणि का मूल आधार है ‘कीमिया ए सआदत’ इसके लेखक मियां मुहम्मद ग़ज़ाली साहब ईरान के एक सुप्रसिद्ध सन्त थे। उनका पूरा नाम था हुज्जतुल इस्लाम अबू हमीद मुहम्मद इब्न-मुहम्मद-अल-तूसी, किन्तु सामान्यतया वे इमाम ग़ज़ाली के नाम से सुप्रसिद्ध है। इनका जन्म सन् 1054 ई. (450 हिज्री) में खुरासान प्रान्त के अन्तर्गत तूस नामक गाँव… continue reading

Mullah Nasiruddin Modern Tales -2

A street cat approached him for some food. He bought a pack of biscuits from a nearby store and started feeding the cat. Cats are everywhere in the streets of Istanbul. The cat finished the entire packet of cream biscuit. He smiled remembering an incident a week back, when his wife had told her the… continue reading

Jamaali – The second Khusrau of Delhi (जमाली – दिल्ली का दूसरा ख़ुसरो)

सूफ़ी-संतों ने हमें सिर्फ़ जीवन जीने की राह ही नहीं बतायी बल्कि अपने पीछे वह अपना विपुल साहित्य भी छोड़ गए जिनसे आने वाली पीढियाँ फैज़ हासिल करती रहीं. सूफ़ी-संतों का साहित्य पढ़कर बमुश्किल यक़ीन होता है कि उस दौर में उनके उठाये गए प्रश्न और उन प्रश्नों पर उनके विचार आज भी उतने ही… continue reading