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हज़रत शरफ़ुद्दीन अहमद मनेरी रहमतुल्लाह अ’लैह

ज़िक्र से मुराद ख़ुदा-वंद तआ’ला की याद है। इसकी चार क़िस्में हैं: 1 ज़बान पर हो लेकिन दिल में न हो, 2 ज़बान और दिल दोनों में हो, मगर दिल किसी वक़्त उससे ग़ाफ़िल हो जाता हो, लेकिन ज़बान पर जारी हो, 3 ज़बान और दिल में बराबर हो, 4 दिल में हो और ज़बान ख़ामोश हो।

हज़रत शैख़ सारंग

जब मख़दूम जहानियां और शैख़ राजू क़त्ताल देहली तशरीफ़ लाए हुए थे उस वक़्त मलिक सारंग एक साहिब-ए-जमाल नौ-जवान थे। सुल्तान की तरफ़ से आप उनकी ख़िदमत पर मामूर हुए। दोनों बुज़ुर्गों की सोहबत ने जज़्बा-ए-इ’ताअत-ए-इलाही और हुब्ब-ए-हक़ीक़ी का शो’ला भड़का दिया तो आपने सुलूक की राह में क़दम रखा और शैख़ क़व्वामुद्दीन अ’ब्बासी रहमतुल्लाह अ’लैह के दस्त-ए-मुबारक पर बैअ’त हुए।

हज़रत मौलाना ज़ियाउद्दीन नख़्शबी- सय्यद सबाहुद्दीन अब्दुर्रहमान

“एक दिन एक ख़्वाजा ने एक लौंडी ख़रीदी।जब रात हुई, लौंडी से कहा ऐ कनीज़क मेरा बिछौना दुरुस्त कर दे कि मैं सो रहूँ। लौंडी ने कहा ऐ मौला क्या तुम्हारा भी मौला है ।ख़्वाजा ने कहा- हाँ। लौंडी ने पूछा- क्या वो सोता है। ख़्वाजा ने कहा- नहीं ।लौंडी ने कहा- तुम्हें शर्म नहीं आती ।तुम्हारा मौला तो जागे और तुम सो रहो”।

Kabir as Depicted in the Persian Sufistic and Historical Works- Dr. Qamaruddin

We have great respect for the remarkable personality of Kabir for he was a true Indian saint and a great Indian poet. In his thoughts and beliefs he was an Indian out and out. Moreover he had an ennobling mission of uniting Hindu and Muslims, which alas, remains unfulfilled even after a lapse of so many centuries.

हज़रत क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी

मौलाना क़ुतुबुद्दीन काशानी देहली आए तो फ़रमाया कि हमीदुद्दीन के इ’श्क़ की वजह से देहली आया हूँ। एक रोज़ उन्होंने क़ाज़ी हमीदुद्दीन की तमाम तसानीफ़ मँगवा कर पढ़ीं और अपने हमराही उ’लमा से कहा कि यारो !जो कुछ हम ने और तुम ने पढ़ा है, वो सब इन रिसालों में मौजूद है, और जो कुछ नहीं पड़ा है वो इ’ल्म भी इन किताबों में मौज़ूद है।

AMIR KHUSRAU AND INDIAN MUSIC-S. K. SINHA

Rome was not built in a day. Indian music today is a treasure that has grown over a period of time to which Hindus and Muslims have contributed largely in varying degrees. Music is strength, ecstasy, and joy; it is the universal language of mankind. In its magical hermitage, here in India, the locals and the aliens both lost their individuality and class consciousness. The symphony and melody rolled them into one. Indian music, like the sea, accepted all the rivers, and today in its trailing clouds of glory one can see the silver lining of a Tan Sen and Palusker as much as of Khusrau, Abdul Karim, and Bade Ghulam Ali.