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सुल्तान सख़ी सरवर लखदाता-मोहम्मदुद्दीन फ़ौक़

आबा-ओ-अज्दाद पौने सात सौ साल का ज़िक्र है कि एक बुज़ुर्ग ज़ैनुल-आ’बिदीन नाम रौज़ा-ए-रसूल-ए-पाक के मुजाविरों में थे।इसी हाल में वहाँ उनको बरसों गुज़र गए।रसूल-ए-करीम की मोहब्बत से सरशार और रौज़ा-ए-अक़्दस की ख़िदमात में मस्त थे कि ख़ुद आँ-हज़रत सलल्ल्लाहु अ’लैहि व-सलल्लम ने एक रात ख़्वाब में फ़रमाया कि उठ और हिन्दुस्तान की सैर कर।आप… continue reading

An apple that ravaged a Sufi’s soul By Meher Murshed

Abu Saleh Mousa Jangi Dost lived sometime in the eleventh century in Naif town in the district of Gilan, present day Iran. He had renounced the world and wandered from village to village, town to town, in search of the truth; to tread the path of the just. One day he was weary from his… continue reading

Count Galaraza (A spanish Student of Waris Pak) and his letter

A strange story is told of a Spanish nobleman of the name of Count Galaraza who came all the way from Spain to pay a visit to Haji Waris Pak and to be initiated in his order in London. A disciple of Haji Saheb who was intrested in spiritualism made an exhibition of his powers…. continue reading

समाअ और क़व्वाली का सफ़रनामा

Sama aur Qawwali ka safarnama

दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह गंगा-जमुनी तहज़ीब और सूफ़ी संस्कृति का एक बुलंदतरीन मरकज़ है । यहाँ तमाम मज़हब के लोगों की आमद और अक़ीदत देखते बनती है । हर जुमेरात  को ख़ासतौर से यहाँ क़व्वाली का आयोजन होता है जिसमें ख़ास-ओ-आम सबकी शिरकत होती है। आजकल भी क़व्वाली लोगों के लिए एक… continue reading

दूल्हा और दुल्हन का आरिफ़ाना तसव्वुर – शमीम तारिक़

दूल्हा और दुल्हन बहुत आम फ़हम अलफ़ाज़ हैं। इनकी तहज़ीबी हैसियत और समाजी मानविय्यत से वो भी वाक़िफ़ हैं जिन्हें दूल्हा या दुल्हन बनने का मौक़ा मिल चुका है और वो भी जो दूसरों की बारात या रुख़्सती देखने पर इक्तिफ़ा करते रहे हैं मगर सूफ़ी और भक्त शाइरों के कलाम में ये दोनों लफ़्ज़… continue reading

Kabir aur Sheikh Taqi Suhrawardi ( कबीर और शेख़ तक़ी सुहरवर्दी )

कबीर भारतीय संस्कृति के एक ऐसे विशाल वट वृक्ष हैं जिसकी छाया में भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं परंपरा को फलने फूलने का अवसर मिला तथा जिसकी इस शीतल छाया के कारन ही भारतीय संस्कृति धर्मान्धता की प्रचंड गर्मी से बची रही और आपसी भाईचारे, धर्म-सहिष्णुता एवं मानव मूल्यों के महत्व को जान पायी, उसे अंगीकार… continue reading