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हज़रत क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार-ए-काकी के मजमूआ’-ए-मल्फ़ूज़ात फ़वाइदुस्सालिकीन का मुताला’ अज़ जनाब मौलाना अख़्लाक़ हुसैन देहलवी साहब

फ़वाइदुस्सालिकीन फ़ारसी नुस्ख़ा मतबूआ सन1310 हिज्री सन1891 ई’सवी मतबूआ’ मुज्तबाई, दिल्ली ,इंडिया, हजम 36  सफ़हात,  साइज़ 20 X 26 ये किताब क़ुतुबल-अक़्ताब हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार ओशी  अल-मुतवफ़्फ़ा सन 633 हिज्री के गिराँ-क़दर मल्फ़ूज़ात  का मजमूआ’ है जिसे हज़रत बाबा फ़रीद मसऊ’द गंज शकर मुतवफ़्फ़ा सन 670 हिज्री ने मुदव्वन फ़रमाया था, ये मजमूआ’–ए-मल्फ़ूज़ात  सात मजालिस पर मुश्तमिल है हर मज्लिस के… continue reading

समाअ और क़व्वाली का सफ़रनामा

Sama aur Qawwali ka safarnama

दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह गंगा-जमुनी तहज़ीब और सूफ़ी संस्कृति का एक बुलंदतरीन मरकज़ है । यहाँ तमाम मज़हब के लोगों की आमद और अक़ीदत देखते बनती है । हर जुमेरात  को ख़ासतौर से यहाँ क़व्वाली का आयोजन होता है जिसमें ख़ास-ओ-आम सबकी शिरकत होती है। आजकल भी क़व्वाली लोगों के लिए एक… continue reading

दूल्हा और दुल्हन का आरिफ़ाना तसव्वुर – शमीम तारिक़

दूल्हा और दुल्हन बहुत आम फ़हम अलफ़ाज़ हैं। इनकी तहज़ीबी हैसियत और समाजी मानविय्यत से वो भी वाक़िफ़ हैं जिन्हें दूल्हा या दुल्हन बनने का मौक़ा मिल चुका है और वो भी जो दूसरों की बारात या रुख़्सती देखने पर इक्तिफ़ा करते रहे हैं मगर सूफ़ी और भक्त शाइरों के कलाम में ये दोनों लफ़्ज़… continue reading

Kabir aur Sheikh Taqi Suhrawardi ( कबीर और शेख़ तक़ी सुहरवर्दी )

कबीर भारतीय संस्कृति के एक ऐसे विशाल वट वृक्ष हैं जिसकी छाया में भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं परंपरा को फलने फूलने का अवसर मिला तथा जिसकी इस शीतल छाया के कारन ही भारतीय संस्कृति धर्मान्धता की प्रचंड गर्मी से बची रही और आपसी भाईचारे, धर्म-सहिष्णुता एवं मानव मूल्यों के महत्व को जान पायी, उसे अंगीकार… continue reading

Indian Sufism

हिंदुस्तान सदियों से सांस्कृतिक चेतना एवं वैचारिक चिंतन की उर्वर भूमि रहा है. कोस कोस पर बदलती भाषाएं, पहनावे एवं मौसम इस संस्कृति की विविधता को जाने किस रंग में रंगते हैं कि दिलों में एकता और सद्भाव का रंग गाढ़ा और गाढ़ा होता चला जाता है. हिंदुस्तान में सूफियों का आगमन एक खुशबू की… continue reading

Malangs of India

हिन्द में सूफ़ियों और संतों के बीच एक कहानी बहुत प्रचलित है – एक संत किसी शहर के जानिब बढ़ा जा रहा है . उसके आने की खबर जब उस शहर में रहने वाले एक दूसरे संत को होती है तो वह उसके लिए पानी से भरा एक प्याला भेज देता है .यह देखकर पहला… continue reading