Articles By Sufinama Archive

Sufinama Archive is an initiative to reproduce old and rare published articles from different magazines specially on Bhakti movement and Sufism.

चिश्तिया सिलसिला की ता’लीम और उसकी तर्वीज-ओ-इशाअ’त में हज़रत गेसू दराज़ का हिस्सा-प्रोफ़ेसर ख़लीक़ अहमद निज़ामी

अ’स्र-ए-हाज़िर का एक मशहूर दीदा-वर मुवर्रिख़ और माहिर-ए-इ’मरानियात ऑरनल्ड टाइन बी, अपनी किताब An Historians  Approach  To Religion (मज़हब मुवर्रिख़ की नज़र में) लिखता है कि तारीख़-ए-उमम ने मज़ाहिब-ए-आ’लम की इफ़ादियत और उनके असर-ओ-नुफ़ूज़ के जाएज़े के लिए एक मुवस्सिर अ’मली पैमाना बना लिया है, और वो है मुसीबत और मा’सियत में इन्सान की दस्त-गीरी की सलाहियत।… continue reading

अस्मारुल-असरार-डॉक्टर तनवीर अहमद अ’ल्वी

अस्मारुल-असरार हज़रत ख़्वाजा सदरुद्दीन अबुल- फ़त्ह सय्यिद मोहम्मद हुसैनी गेसू-दराज़ बंदा नवाज़ की तस्नीफ़-ए-मुनीफ़ है और जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है कि हज़रत के रुहानी अफ़्कार और कश्फ़-ए-असरार से है जिसका बयान आपकी ज़बान-ए-सिद्क़ से रिवायात-ओ-हिकायात की सूरत में हुआ है।जिनके साथ कलामुल्लाह की रौशन आयात और अहादीस-ए-रसूल-ए-मक़्बूल से इस्तफ़ाद-ओ-इस्तिनाद किया गया है।असरार-ए-ग़ैब… continue reading

हज़रत बाबा साहिब की दरगाह-मौलाना वहीद अहमद मसऊ’द फ़रीदी

दरगाह का दरवाज़ा जानिब-ए-मशरिक़ बुलंद-ओ-रफ़ी’ है।उसके सामने अंदर को रौज़ा है।जाते हुए सीधे हाथ को समाअ’-ख़ाना है। रौज़ा के अंदर जगह मुख़्तसर है। इस के मशरिक़ी दरवाज़े में दाख़िल होते ही पहला मज़ार हज़रत बदरुद्दीन सुलैमान (रहि·) का है। उस के क़रीब बराबर को दूसरा मज़ार हज़रत-ए-वाला का है। मज़ार के मग़रिब में काफ़ी जगह… continue reading

हज़रत गेसू दराज़ हयात और ता’लीमात-प्रोफ़ेसर निसार अहमद फ़ारूक़ी

हज़रत ख़्वाजा सय्यिद मोहम्मद हुसैनी गेसू दराज़ (रहि·) सिलसिला-ए-आ’लिया चिश्तिया निज़ामिया की ऐसी बुलंद-पाया शख़्सियत हैं जिन्हों ने इस सिलसिले का रुहानी फैज़ान जुनूबी हिंद के आख़िरी सिरे तक पहुंचा दिया। आज सर-ज़मीन-ए-दकन की सैकड़ों चिश्ती ख़ानक़ाहें हज़रत गेसू दराज़ (रहि·) की कोशिशों का समरा हैं।आपके बारहवें दादा सय्यिद अ’ली हुसैनी हिरात से दिल्ली तशरीफ़ लाए… continue reading

बाबा फ़रीद शकर गंज का कलाम-ए- मा’रिफ़त-प्रोफ़ेसर गुरबचन सिंह तालिब

हज़रत बाबा फ़रीद साहिब का मक़ाम ब-हैसियत एक रुहानी पेशवा के हिन्दुस्तान भर में मुसल्लम है। उनके अ’क़ीदत-मंद पाकिस्तान, अफ़्ग़ानिस्तान, बंगलादेश और हमारे सभी हम-सया मुल्कों में मौजूद हैं मगर उनसे जो क़ुर्ब पंजाब के अ’वाम को है वो यक़ीनन अपनी मिसाल आप है। उस का सबब ये है कि ज़बान और मक़ाम की वहदत के… continue reading

ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी-हज़रत मुल्ला वाहिदी देहलवी

दिल्ली की जामा’ मस्जिद से साढे़ ग्यारह मील जानिब-ए-जनूब मेहरवली एक क़स्बा है जो बिगड़ कर मेहरौली हो गया है। दिल्ली वाले इसे क़ुतुब साहिब और ख़्वाजा साहिब भी कहते हैं। यहाँ बड़े-बड़े औलिया-अल्लाह मदफ़ून हैं। इनमें सबसे बड़े क़ुतुबुल-अक़ताब ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाहि अ’लैहि हैं। यहीं क़ुतुब की नादिरुल-वजूद लाठ है। ये सुल्तान क़ुतुबुद्दीन ऐबक की मस्जिद क़ुव्वतुल-इस्लाम का मीनार है। यहीं दरवेश मनिश बादशाह शम्सुद्दीन अल्तमिश का मज़ार है और दिल्ली जिन बुज़ुर्गों की वजह से ‘बाईस ख़्वाजा की चौखट’ से मशहूर है उन बाईस में से अक्सर ख़्वाजगान इसी क़स्बा में आराम फ़रमा रहे हैं।

बक़ा-ए-इंसानियत के सिलसिला में सूफ़िया का तरीक़ा-ए-कार- मौलाना जलालुद्दीन अ’ब्दुल मतीन ,फ़िरंगी महल्ली,लखनऊ

बात की इब्तिदा तो अल्लाह या ईश्वर के नाम ही से है जो निहायत मेहरबान और इंतिहाई रहम वाला है और सब ता’रीफ़ तो ईश्वर या अल्लाह की ही है जो सब जगतों का पालनहार है।जिसका कोई साझी नहीं है।जो निहायत रहम वाला मेहरबान है।उसका सलाम मोहम्मद सल्लल्लाहु अ’लैहि वसल्लम,आल-ए-मोहम्मद,अस्हाब-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु अ’लैहि वसल्लम और उनके… continue reading

हज़रत मीराँ जी शम्सुल-उ’श्शाक़- प्रोफ़ेसर निसार अहमद फ़ारूक़ी

उर्दू ज़बान की सर-परस्ती सब से ज़ियादा सूफ़िया ने की है।इसलिए कि उनका राब्ता अ’वाम और उनके मसाइल से था जिसके लिए अ’वामी ज़रिआ’-ए-इज़हार को समझना और बरतना भी ज़रूरी था।जब कि उ’लमा का सर-ओ-कार बेशतर इ’ल्मी मसाइल की तशरीह-ओ-तावील,तफ़्सीर-ओ-ता’बीर से रहा।और इस मक़्सद के लिए उन्हों ने अक्सर फ़ारसी ज़बान को वसीला बनाया जो… continue reading

हज़रत बंदा नवाज़ गेसू दराज़-अज़ जनाब सय्यिद हाशिम अ’ली अख़तर

आपका इस्म-ए-मुबारक सय्यिद मोहम्मद था।अबुल-फ़त्ह कुनिय्यत और अलक़ाब सदरुद्दीन वलीउल-अकबर अस्सादिक़ लेकिन वो हमेशा हज़रत बंदा-नवाज़ गेसू दराज़ के नाम से मशहूर रहे।ख़ुद अपनी ज़िंदगी में उन्हें इसी नाम से मक़्बूलियत थी। नसब आपके जद्द-ए-आ’ला अबुल-हसन जुन्दी हिरात से दिल्ली तशरीफ़ लाए थे।दिल्ली में क़याम फ़रमाया। एक जिहाद में शरीक हो कर जाम-ए-शहादत नोश फ़रमाया।हज़रत गेसू… continue reading

बाबा फ़रीद के श्लोक-जनाब महमूद नियाज़ी

गुरु ग्रंथ साहिब में बाबा फ़रीद के श्लोक के नाम से एक अ’लाहिदा बाब है जिसमें मुल्तानी ज़बान के 112 श्लोक हैं। इन श्लोकों को हज़रत बाबा फ़रीदुद्दीन मसऊ’द गंज शकर रहमतुल्लाहि अ’लैह से मंसूब किया जाता है।इन श्लोकों के बारे में लोगों ने तरह-तरह की क़यास-आराइयाँ की हैं।कोई तो इनको शैख़ इब्राहीम फ़रीद सानी रहमतुल्लाहि अ’लैह… continue reading