हज़रत ख़्वाजा मुई’नुद्दीन चिश्ती की दरगाह- प्रोफ़ेसर निसार अहमद फ़ारूक़ी

 तारीख़ की बा’ज़ अदाऐं अ’क़्ल और मंतिक़ की गिरफ़्त में भी नहीं आतीं। रू-ए-ज़मीन पर ऐसे हादसात भी गुज़र गए हैं जिनसे आसमान तक काँप उठा है मगर तारीख़ के हाफ़िज़े ने उन्हें महफ़ूज़ करने की ज़रूरत नहीं समझी और एक ब-ज़ाहिर बहुत मा’मूली इन्फ़िरादी अ’मल-ए-जावेदाँ बन गया है और उसके असरात सदियों पर फैल… continue reading

What is Sufism ? – Mir Valiuddin

Scholars wrangle about the derivation of the word Sufi though about its exact connotation I do not think that there is any reason to quarrel. Let us cast a hurried glance at the various attempts of the lexicographers:— 1. Some say: “The Sufis were only named Sufis because of the purity (Safa) of their hearts… continue reading

PAANCH PIR- MUHAMMAD ENAMUL HAQ

Introductory: Belief in Paanch Pir is a universal phenomenon all over Northern Indo-Pak sub-continent. It forms a cult known as ‘PAANCH PIRIYA,’ which neither orthodox Islam nor orthodox Hinduism claims as its own. Yet the belief is widely prevalent among the adherents of both the religions. In fact, uneducated Muslims pay homage to and low-caste… continue reading

शाह नियाज़ बरैलवी ब-हैसिय्यत-ए-एक शाइ’र- हज़रत मैकश अकबराबादी

अक्सर अहल-ए-कमाल ऐसे होते हैं जिनमें चंद कमालात मुज्तमा’ हो जाते हैं मगर बा’ज़ कमाल इस दर्जा नुमायाँ होते हैं कि उनके दूसरे कमालात उन कमालात में मह्व हो कर रह जाते हैं ।मसलन हकीम मोमिन ख़ाँ का तिब्ब और नुजूम शाइ’री में दब कर रह गया, ज़ौक़ और मीर का इ’ल्म-ओ-फ़ज़्ल शाइ’री में गुम… continue reading

हज़रत सय्यद शाह अमीन अहमद फ़िरदौसी

किसी भी शै को मुमताज़ और ख़ुश-गवार बनाने के लिए ग़ैर मा’मूल सिफ़त का होना ज़रूरी होता है ख़ाह वो शाहाँ-ए-ज़माना हो या सूफ़िया-ए-किराम जिनकी हसीन तर ज़िंदगी या’नी अख़्लाक़-ओ-किर्दार की बिना पर वो शहर-ए-जहाँ ये बस्ते हैं मुम्ताज़ होती है,इस तरह इमतिदाद-ए-ज़माना के बा’द रफ़्ता-रफ़्ता उन शाहों के रसूख़ में कमी आने लगती है… continue reading

THE KHAN KHANAN AND HIS PAINTERS, ILLUMINATORS AND CALLIGRAPHERS- M. MAHFUZ UL HAQ .

WE know so little about the life-history of the artists of the period of Akbar and Jahangir—nay, of the Mughal artists in general—that even a scrap of paper, which may throw light on the biography of these artists, is of value to a student of Mughal art. Writers on Mughal painting have ordinarily made use… continue reading