सुल्तानुल-मशाइख़ और उनकी ता’लीमात-हज़रत मोहम्मद आयतुल्लाह जा’फ़री फुलवारवी

सुल्तानुल-मशाइख़ की शख़्सियत पर अब तक बहुत कुछ लिखा जा चुका है इसलिए उनकी शख़्सियत के किसी नए गोशे का इन्किशाफ़ मुश्किल है।सीरत-ओ-शख़्सियत के किसी नए पहलु तक मुहक़्क़िक़ीन और अहल-ए-क़लम ही की रसाई हो सकती है।ख़ाकसार इसका अहल नहीं।ये चंद सतरें सुल्तानुल-मशाइख़ महबूब-ए-इलाही हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, क़ुद्दिसा सिर्रहु से अ’क़ीदत-ओ-मोहब्बत के नतीजे में और सिलसिला-ए-चिश्तिया… continue reading

मकनपुर शरीफ़ चित्रावली

मकनपुर कानपुर शहर से 66 किलोमीटर की दूरी पर बसा एक सुन्दर गाँव है जहाँ हज़रत सय्यद बदीउद्दीन ज़िन्दा शाह मदार की दरगाह स्थित है. अप्रैल 2011 में मेरा मकनपुर जाना हुआ था. मैं मलंगों से सम्बंधित अपने निजी शोध के लिए वहां गया था और 3 दिन रहा. उस दौरान बहुत सी तस्वीरें भी… continue reading

ख़ानक़ाह हज़रत मैकश अकबराबादी,आगरा में संरक्षित सूफ़ी चित्रों का दुर्लभ संसार

ख़ानक़ाह शब्द फ़ारसी से लिया गया है जिसके मा’नी हैं ऐसी जगह जहाँ एक सूफ़ी सिलसिले के लोग किसी मुर्शिद के निर्देशन में आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं . यहाँ अध्यात्म पर चर्चाएं होती हैं और आपसी सद्भाव का सूफ़ी सदेश आम किया जाता है. हिंदुस्तान में सूफ़ी ख़ानक़ाहों का एक लम्बा और प्रसिद्द इतिहास… continue reading

आगरा में ख़ानदान-ए-क़ादरिया के अ’ज़ीम सूफ़ी बुज़ुर्ग

आगरा की सूफ़ियाना तारीख़ उतनी ही पुरानी है जितनी ख़ुद आगरा की।आगरा श्री-कृष्ण के दौर से ही मोहब्बत और रूहानियत का मर्कज़ रहा लेकिन मुस्लिम सूफ़ियाना रिवायत की इब्तिदा सुल्तान सिकंदर लोदी से होती है, जिसने आगरा को दारुल-सल्तनत बना कर अज़ सर-ए-नै ता’मीर किया। ये रौनक़ अकबर-ए-आ’ज़म और शाहजहाँ तक आते आते दो-बाला हो… continue reading

हज़रत ग़ौस ग्वालियरी और योग पर उनकी किताब बह्र उल हयात

हज़रत ग़ौस ग्वालियरी शत्तारिया सिलसिले के महान सूफ़ी संत थे. शत्तारी सिलसिला आप के समय बड़ा प्रचलित हुआ. ग़ौस ग्वालियरी हज़रत शैख़ ज़हूर हमीद के मुरीद थे. अपने गुरु के आदेश पर आप चुनार चले गए और अपना समय यहां ईश्वर की उपासना में बिताया. चुनार में हज़रत 13 साल से अधिक समय तक रहे…. continue reading

उमर ख़य्याम की बीस रुबाइयाँ

उमर ख़य्याम (1041-1131) अपनी किताब रुबाइयात के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। फिट्जगेराल्ड द्वारा इनकी रुबाइयात के अंग्रेज़ी अनुवाद के बाद इनका नाम मशरिक और मग़रिब दोनों में मक़बूल हो गया । मौलाना रूमी की मसनवी के बाद सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों में रुबाइयात का शुमार होता है।  कहा जाता है कि… continue reading