online casino india

हज़रत शैख़ अ’लाउ’द्दीन क़ुरैशी-ग्वालियर में नवीं सदी हिज्री के शैख़-ए-तरीक़त और सिल्सिला-ए-चिश्तिया के बानी

हिन्दुस्तान की तारीख़ भी कितनी अ’ज़ीब तारीख़ है। यहाँ कैसी कैसी अ’दीमुन्नज़ीर शख़्सियतें पैदा हुईं। इ’ल्म-ओ-इर्फ़ान के कैसे कैसे सोते फूटे।
हिंदुस्तान से अ’रब का तअ’ल्लुक़ एक क़दीम तअ’ल्लुक़ है। मशाएख़ीन-ए-तरीक़त ने अपनी बे-दाग़ ज़िंदगी यहाँ अ’वाम के सामने रखी। यहाँ की बोलियों में उनसे कलाम किया।

बाबा फ़रीद के श्लोक-जनाब महमूद नियाज़ी

गुरु ग्रंथ साहिब में बाबा फ़रीद के श्लोक के नाम से एक अ’लाहिदा बाब है जिसमें मुल्तानी ज़बान के 112 श्लोक हैं। इन श्लोकों को हज़रत बाबा फ़रीदुद्दीन मसऊ’द गंज शकर रहमतुल्लाहि अ’लैह से मंसूब किया जाता है।इन श्लोकों के बारे में लोगों ने तरह-तरह की क़यास-आराइयाँ की हैं।कोई तो इनको शैख़ इब्राहीम फ़रीद सानी रहमतुल्लाहि अ’लैह… continue reading

तल्क़ीन-ए-मुरीदीन-हज़रत शैख़ शहाबुद्दीन सुहरवर्दी

इंतिख़ाब-ओ-तर्जुमा:हज़रत मौलाना नसीम अहमद फ़रीदी अल्लाह तआ’ला फ़रमाता है ‘वला ततरुदिल-लज़ी-न यद्ऊ’-न रब्बहुम बिल-ग़दाति-वल-अ’शीयी युरीदून वज्ह-हु।’ (आप न हटाएं अपने पास से उन लोगों को जो अपने रब को सुब्ह-ओ-शाम पुकारते हैं और उनका हाल ये है कि बस अपने रब की रज़ा चाहते हैं)। लफ़्ज़-ए-इरादत जो ख़ास इस्तिलाह के तौर पर मशाइख़-ए-सूफ़िया के यहाँ… continue reading

बाबा फ़रीद के मुर्शिद और चिश्ती उसूल-ए-ता’लीम-(प्रोफ़ेसर प्रीतम सिंह)

 तर्जुमा:अनीस अहमद फ़रीदी फ़ारुक़ी एम-ए (अ’लीग ) हज़रत शैख़ फ़रीदुद्दीन मसऊ’द गंज शकर रहमतुल्लाहि अ’लैह पंजाबी बुज़ुर्ग हैं जिन्हों ने ख़ानवादा-ए-आ’लिया चिश्तिया की मसनद-ए-सदारत को ज़ीनत बख़्शी। आप उन चंद नुफ़ूस-ए-क़ुदसिया में से एक हैं जिनकी मंज़ूमात को सिखों के मुक़द्दस सहीफ़े में बा-इ’ज़्ज़त मक़ाम दिया गया है। बाबा फ़रीद को पंजाबी शाइ’री का बावा-आदम भी… continue reading

अमीर ख़ुसरो के अ’हद की देहली-जनाब हुस्नुद्दीन अहमद

ये बात बड़ी ख़ुश-आइंद है कि सात सौ साल के बा’द हिन्दुस्तान में अमीर ख़ुसरो की बाज़याफ़्त की कोशिश मुनज़्ज़म और वसीअ’ पैमाना पर हो रही है।इस सिलसिले में एक अहम काम अमीर ख़ुसरो के अ’हद के देहली और उसकी ज़िंदगी के मुतअ’ल्लिक़ ज़्यादा से ज़्यादा मालू’मात फ़राहम करना है।इन मा’लूमात से अगर एक तरफ़… continue reading

हज़रत गेसू दराज़ का मस्लक-ए-इ’श्क़-ओ-मोहब्बत-जनाब तय्यब अंसारी

हज़रत अबू-बकर सिद्दीक़ रज़ी-अल्लाहु अ’न्हु ने फ़रमाया था: परवाने को चराग़ है, बुलबुल को फूल बस सिद्दीक़ के लिए है ख़ुदा का रसूल बस रसूलुल्लाहि सल्लल्लाहु अ’लैहि वसल्लम अफ़ज़ल हैं या सय्यिद मोहम्मद ? तो उसने हज़रत अबू-बकर सिद्दीक़ रज़ी-अल्लाहु अ’न्हु की तरह कुछ ऐसा ही जवाब दिया। “हज़रत मोहम्मद रसूलुल्लाहि सल्लल्लाहु अ’लैहि वसल्लम अगर्चे पैग़म्बर-ए-ख़ुदा हैं… continue reading