दक्खिनी हिन्दी के सूरदास -सैयद मीरां हाशमी- डॉ. रहमतउल्लाह

ब्रजभाषा के महाकवि सूरदास के अतिरिक्त दक्खिनी हिन्दी में भी एक सूरदास हो चुका है जिसका नाम सैयद मीरां हाशमी बताया जाता है और जो दक्षिण भारत के आदिलशाही राज्यकाल का प्रसिद्ध कवि था। दक्खिनी हिन्दी का अधिकांश साहित्य इसी राज परिवार के संरक्षण में लिखा गया था। सन् 1685 ई. में मुगल सम्राट् औरंगजेब… continue reading

Fawaid ul fuwaad (Morals For The Heart) – Book review

तसव्वुफ़ में साहित्य के विशाल भंडार को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है । मक्तूबात (पत्र ), तज़किरा (जीवनवृत) एवं मल्फ़ूज़ात (उपदेश)। मक्तूबात के अंतर्गत उन पत्रों का संकलन आता है जो सूफी संतों ने अपने  मुरीदों और समकालीन संतों को लिखे हैं  । तज़किरे के अंतर्गत जीवनवृत संग्रह आता है जो… continue reading

If rain can grow sugarcane, man can realize the Divine – the story of Shaikh Muhibullah

O’ Beauty of Truth, the Eternal Light! Do I call you necessity and possibility, Do I call you the ancient divinity, The One, creation and the world, Do I call you free and pure Being, Or the apparent lord of all, Do I call you the souls, the egos and the intellects, The imbued manifest… continue reading

Sufiyon ka Bhakti Raag ( सूफ़ियों का भक्ति राग )

तसव्वुफ मुसलमानों के नज़दीक मज़हब के आंतरिक पक्ष का नाम है। इससे तात्पर्य वह तपस्या और संयम है जो दिल के पर्दे हटाये और सत्य का रहस्योद्घाटन करे। तसव्वुफ के उद्भव एवं विकास के दो युग बताये जाते है। पहला युग इस्लाम के आरम्भ से नवीं सदी ईस्वी के शुरु तक और दूसरा नवी सदी… continue reading

This Path is not about religion: Just faith

The lyrical notes enveloped his senses. He was mesmerized. A band of wandering minstrels was exhorting Moinuddin Chishti. And just then Moghul emperor Akbar was enveloped by a yearning; he had to go to Ajmer. It was sometime during the 1560s. The emperor travelled to the shrine to pray and distribute money among the poor… continue reading

Khwaja Muinuddin’s Seven Illuminating Letters To his Spiritual Successor

A veritable mine of “Game of Wisdom” In this Blog, we reproduce seven of the most illuminating and thought-provoking letters on the cult of Sufism which Hazrat Khwaja Muinuddin Chishti affectionately wrote from Ajmer to his Khalifa (spiritual successor) Khawaja Qutubuddin Bakhtiyar kaki (may peace of God be upon his soul) who was the accredited… continue reading