Articles By Sufinama Archive

Sufinama Archive is an initiative to reproduce old and rare published articles from different magazines specially on Bhakti movement and Sufism.

हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी- ख़्वाजा हसन सानी निज़ामी

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगान, हज़रत ख़्वाजा अजमेरी रहमतुल्लाहि अलै’ह हिन्दुस्तान में भेजे हुए आए थे।वो नाइब-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलै’हि-व-सल्लम और अ’ता-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलै’हि-व-सल्लम हैं। सरकार-ए-दो-आ’लम सल्लल्लाहु अलै’हि-व-सल्लम के रुहानी इशारे और हुक्म पर उन्होंने हमारी इस धरती के भाग्य जगाए लेकिन उनके जानशीन हज़रत ख़्वाजा क़ुतुब  रहमतुल्लाहि अलै’ह का दम क़दम, हम दिल्ली वालों की मोहब्बत और अ’क़ीदत का… continue reading

अलाउल की पद्मावती-वासुदेव शरण अग्रवाल

मलिक मुहम्मद जायसी कृत पद्मावत की व्याख्या लिखते हुए मेरा ध्यान पद्मावत के अन्य अनुवादों की ओर भी आकृष्ट हुआ। उनमें कई फ़ारसी भाषा के अनुवाद विदित हुए। किन्तु एक जिसकी और हिन्दी जगत का विशेष ध्यान जाना चाहिए वह बंगाली भाषा में किया हुआ वहाँ के प्रसिद्ध मुसलमान कवि अलाउल का अनुवाद है। यह… continue reading

रसखान के वृत्त पर पुनर्विचार-कृष्णचन्द्र वर्मा

      रसखान के जीवनवृत्त पर सर्वप्रथम प्रकाश डालने का श्रेय श्री किशोरीलाल गोस्वामी को है। वे रसखान की रचनाओं के अनन्य भक्त थे तथा बड़े श्रम से उन्होंने रसखान के काव्य और जीवनवृत्त से हिन्दी के साहित्यानुरागियों को सन् 1891 में ‘सुजान रसखान’ नामक ग्रंथ द्वारा परिचित कराया। लगभग 50 वर्ष तक हिंदी के विद्वानों… continue reading

कविवर रहीम-संबंधी कतिपय किवदंतियाँ -याज्ञिकत्रय

      प्रसिद्ध पुरुषों के विषय में जो जनश्रुतियाँ साधारण जन-समाज में प्रचलित हो जाती हैं, वे सर्वथा निराधार नहीं होतीं। यद्यपि उनमें कल्पना की मात्रा अधिक होती है, तथापि उनका ऐतिहासिक मूल्य भी कुछ-न-कुछ अवश्य होता है। किवदंतियों में मनोरंजन की सामग्री भी होती है, इस कारण वे मौखिक रूप में हो अनेकों शताब्दियों तक… continue reading

बक़ा-ए-इन्सानियत में सूफ़ियों का हिस्सा- (हज़रत शाह तुराब अ’ली क़लंदर काकोरवी के हवाला से)

क़ुरआन-ए-मजीद में इर्शाद है ‘लक़द मन्नल्लाहु अ’लल-मोमिनीना-इज़ा-ब’असा-फ़ीहिम रसूलन मिन-अन्फ़ुसिहिम यतलू अ’लैहिम आयातिहि-व-युज़क्कीहिम-व-युअल्लि’मुहुमुल-किताबा-वल-हिकमत’.(आल-ए-इ’मरान) या’नी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ’लैहि-व-सल्लम की बि’सत का मक़्सद ये हुआ कि वो लोगों को अल्लाह तआ’ला की  आयात-ओ-निशानियों से बा-ख़बर करें।उनके नुफ़ूस का तज़्किया-ओ-निशानियों से ज़िंदगियाँ निखारें और सँवारें और उन्हें किताब-ओ-हिक्मत का सबक़ पढ़ाऐं। जिस तरह पैग़म्बरों की बि’सत मख़्लूक़ पर एहसान-ए-अ’ज़ीम… continue reading

नाथ-योगी-सम्प्रदाय के ‘द्वादश-पंथ’-परशुराम चतुर्वेदी

नाथ-योगी सम्प्रदाय के इतिहास पर विचार करते समय हमारी दृष्टि, स्वभावतः, इसके उन अनेक पंथों व शाखा-प्रशाखाओं की ओर भी चली जाती है जिनके विभिन्न केन्द्र भारत के प्रायः प्रत्येक भाग में बिखरे पड़े हैं। उनके विषय में कभी-कभी ऐसा कहा जाता है कि वे पहले, केवल 12 पृथक्-पृथक् संस्थाओं के ही रूप में, संघटित… continue reading

हाजी वारिस अ’ली शाह का पैग़ाम-ए-इन्सानियत- डॉक्टर सफ़ी अहमद काकोरवी

उन्नीसवीं सदी का दौर है। अवध की फ़िज़ा ऐ’श-ओ-इ’श्रत से मा’मूर है। फ़ौजी क़ुव्वतें और मुल्की इक़्तिदार रू ब-ज़वाल हैं। मगर उ’लमा-ए-हक़ और सूफ़िया-ए-पाक-तीनत का फ़ुक़दान नहीं है। उन सूफ़िया-ए-साफ़ बातिन ने अ’वाम-ओ-ख़्वास और अपने हाशिया-नशीनों को इन्सानियत का मफ़्हूम समझाया। उन्हों ने आ’ला अक़्दार इस तरह लतीफ़ पैराए में उनके ज़िहन-नशीन कराए कि वो… continue reading

तज़्किरा-ए-फ़ख़्र-ए-जहाँ देहलवी -प्रोफ़ेसर निसार अहमद फ़ारूक़ी

मियाँ अख़लाक़ अहमद साहिब मरहूम मुहिब्बान-ए-औलिया-उल्लाह में से थे। मेरे हाल पर भी नज़र-ए-इ’नायत रखते थे। कभी कभी ख़त लिख कर याद फ़रमाया करते थे। मेरी बद-क़िस्मती है कि कभी उनसे मुलाक़ात का शरफ़ हासिल नहीं हुआ और 1989 ई’सवी में जब मेरा लाहौर जाना हुआ तो उनके मज़ार पर ही हाज़िरी हो सकी। अल्लाह… continue reading

हज़रत सय्यिद मेहर अ’ली शाह – डॉक्टर सय्यिद नसीम बुख़ारी कलीमी फ़रीदी

हज़रत सय्यिद मेहर अ’ली शाह1859 ई’स्वी में रावलपिंडी से ग्यारह मील के फ़ासिला पर क़िला गोलड़ा में पैदा हुए। आपके वालिद हज़रत सय्यिद नज़र शाह को आपकी विलादत की ख़ुश-ख़बरी एक मज्ज़ूब ने दी थी। मज्ज़ूब ना-मा’लूम इ’लाक़ा से आया था और सय्यिद मेहर अ’ली शाह की विलादत के फ़ौरन बा’द आप की ज़ियारत कर… continue reading

Kabir as Depicted in the Persian Sufistic and Historical Works- Dr. Qamaruddin

In the present age of comparative religious tolerance, it is no great to feat to preach religious harmony or to denounce meaningless  ritual. But to do so almost five hundred years ago in a country like India called for a brave, a truly inspired man. Such a man was Kabir who was born in an… continue reading