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हज़रत शैख़ अ’लाउ’द्दीन क़ुरैशी-ग्वालियर में नवीं सदी हिज्री के शैख़-ए-तरीक़त और सिल्सिला-ए-चिश्तिया के बानी

हिन्दुस्तान की तारीख़ भी कितनी अ’ज़ीब तारीख़ है। यहाँ कैसी कैसी अ’दीमुन्नज़ीर शख़्सियतें पैदा हुईं। इ’ल्म-ओ-इर्फ़ान के कैसे कैसे सोते फूटे।
हिंदुस्तान से अ’रब का तअ’ल्लुक़ एक क़दीम तअ’ल्लुक़ है। मशाएख़ीन-ए-तरीक़त ने अपनी बे-दाग़ ज़िंदगी यहाँ अ’वाम के सामने रखी। यहाँ की बोलियों में उनसे कलाम किया।

आस्ताना-ए-ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ में ख़ुद्दाम साहिब-ज़ादगान, सय्यिद-ज़ादगान औलाद-ए-हज़रत ख़्वाजा सय्यिद फ़ख़्रुद्दीन गर्देज़ी रहमतुल्लाहि अ’लैह

ये नसब-नामा-ए-मौरुसी ख़ुद्दाम-ए-हुज़ूर ख़्वाजा ग़रीब-नवाज़ रहमतुल्लाहि अ’लैह का है।ख़ुद्दाम-ए-ख़्वाजा का लक़ब इस ख़ानदान के हर फ़र्द की पहचान है।अपने मुरिस-ए-आ’ला हज़रत ख़्वाजा सय्यिद फ़ख़रुद्दीन गर्देज़ी रहमतुल्लाहि अ’लैह से इस लक़ब को मंसूब कर के इसे अपना तुर्रा-ए-इम्तियाज़ और जुज़्व नाम बनाया है। जिन मुरिस-ए-आ’ला का ज़िक्र मज़्कूरा-बाला किया है उनकी तफ़्सील ये है कि हज़रत… continue reading

अमीर ख़ुसरो की शाइ’री में सूफ़ियाना आहँग 

हिन्दुस्तान में इब्तिदा ही से इ’ल्म-ओ-अदब,शे’र-ओ-हिक्मत, तसव्वुफ़-ओ-मा’रिफ़त,अदाकारी-ओ-मुजस्समा-साज़ी और मौसीक़ी-ओ-नग़्मा-संजी का रिवाज है।अ’ह्द-ए-क़दीम से लेकर दौर-ए-हाज़िर तक ऐसी बे-शुमार शख़्सियात इस सर-ज़मीन पर पैदा होती रही हैं जिन्होंने अपने कारहा-ए-नुमायाँ से हिन्दुस्तान का नाम सारी दुनिया में रौशन किया।उन्हीं शख़्सियतों में एक ताबिंदा और बा-वक़ार नाम अबुल-हसन यमीनुद्दीन ख़ुसरो का भी है जिन्हें ‘तूती-ए-हिंद’ का शरफ़… continue reading

ज़िक्र-ए-ग़ौस-ए-आ’ज़म अ’ब्दुल-क़ादिर जीलानी- हज़रत मैकश अकबराबादी

इस्म-ए-मुबारक अ’ब्दुल-क़ादिर,लक़ब मुहीउद्दीन और कुन्नियत अबू-मोहम्मद है।नसब-ए-मुबारक वालिद-ए-बुज़ुर्गवार की तरफ़ से इमाम-ए-दोउम हज़रत सय्यिदिना हसन अ’लैहिस्सलाम तक और मादर-ए-मोहतरमा की जानिब से इमाम-ए-सेउम हज़रत सय्यदुश्शुहदा इमाम हुसैन अ’लैहिस्सलाम तक पहुंचता है। शैख़ अ’ब्दुल-हक़ मुहद्दिस दिहलिवी ने आपका ज़िक्र-ए-मुबारक और सन-ए-विलादत-ओ-वफ़ात का ज़िक्र इस तरह किया है। क़ुतुबुल-अक़ताब,फ़र्दुल-अहबाब,ग़ौसुल-आ’ज़म,शैख़-ए-शुयूख़ुल-आ’लम,ग़ौसुस्सक़लैन,इमामुत्ताइफ़ीन,शैख़ुत्तालिबीन,शैख़ुल-इस्लाम मुहीउद्दीन अबू मोहम्मद अ’ब्दुल-क़ादिर अल-हसनी-अल-हुसैनी अल-जीलानी रज़ी-अल्लाहु अ’न्हु… continue reading

वेदान्त – हज़रत मैकश अकबराबादी

हम कौन हैं,काएनात क्या है,तख़्लीक़ का मक़्सद क्या है,इस ज़िंदगी के सफ़र की इंतिहा क्या है,नजात और उसके हासिल करने के ज़रीऐ’ क्या हैं,ये और इस क़िस्म के कई अहम सवाल हैं जिनको फ़ल्सफ़ी दलीलों से हल करना चाहते हैं  मुक़ल्लिदीन अपने रहबरों के अक़वाल से,आ’रिफ़ अपने कश्फ़-ओ-शुहूद और विज्दान से फ़ल्सफ़ा-ए-हक़ीक़त की जुस्तुजू से।मगर… continue reading

तरीक़ा-ए-सुहरवर्दी की तहक़ीक़-मीर अंसर अ’ली

ज़ैल में दो आ’लिमाना ख़त तहरीर किए जाते हैं जो जनाब मौलाना मीर अनसर अ’ली चिश्ती निज़ामी अफ़सर-ए-आ’ला महकमा-ए-आबकारी,रियासत-ए-हैदराबाद दकन ने अ’र्सा हुआ इर्साल फ़रमाए थे। मीर मौसूफ़ नए ज़माना के तअस्सुरात के सबब फ़ुक़रा और हज़रात-ए-सूफ़िया-ए-किराम से बिल्कुल बद-अ’क़ीदाथे,मगर आपकी वालिदा मोहतरमा ने ब-वक़्त-ए- रिहलत ऐसी नेक दुआ’ दी कि फ़ौरन हज़रत मख़दूम सय्यिद… continue reading